
कार्तिक स्नान image AI
Kartik Snan : सनातन धर्म में कार्तिक माह को सबसे शुभ माना गया है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय माह बताया जाता है। वैदिक परंपरा के अनुसार, कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त स्नान की परंपरा है। इसे कार्तिक स्नान कहा जाता है। पवित्र जल में स्नान और पूजन पाठ से विष्णुजी प्रसन्न होते हैं। उनके आशीर्वाद के रूप में सुख और संपत्ति प्राप्त होती है। कार्तिक स्नान में पूरे माह गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना विशेष रूप से फलदायक है। यह संभव नहीं हो तो घर पर बाल्टी में इन पवित्र नदियों के जल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान कर सकते हैं। दरअसल कार्तिक माह में शुद्धिकरण का महत्व है। महीने भर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर ईश आराधना आदर्श रूटीन के मान्य की गई है जोकि बेहद शुभ परिणामदायक मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि कार्तिक माह में सूर्योदय से करीब डेढ घंटे पहले जागकर स्नान करना चाहिए। यह ब्रह्म मुहूर्त की अवधि है। स्नान के बाद घर के पूजास्थल पर देशी घी का दीप जलाएं, मुख्य द्वार के दोनों तरफ भी दीप जलाकर रखें। दरअसल कार्तिक स्नान के साथ ही यह माह दीपदान के लिए भी जाना जाता है। कार्तिक दीप का अर्पण विशेष परिणामदायक होता है।
सूर्योदय से कम से कम 90 मिनट पहले उठें, नित्य कर्म के बाद बाल्टी के पानी में पवित्र जल मिलाकर स्नान कर लें। साफ कपड़े पहनें, यथासंभव सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनें। तांबे के कलश में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद विष्णुजी की मूर्ति के सामने देशी घी का दीप जलाएं। विष्णुजी या कृष्णजी के किसी मंत्र का जाप करें या भगवद गीता पढ़ें। विष्णुसहस़्त्रनाम स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी होता है।
तुलसी के सामने घी का दीपक जलाएं और तुलसी कोट की परिक्रमा करें।
कार्तिक में यदि पूरे माह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान नहीं कर पाते है। पांच दिनों तक यह क्रम करने की कोशिश करें। देव उठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक भी कार्तिक स्नान की परंपरा निभाई जाती है।
Updated on:
26 Oct 2026, 5:03 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 5:03 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.