सावन महीना में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सात्विक भोजन करना चाहिए।
सावन का महीना ( sawan month ) भगवान शिव ( Lord Shiva ) सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में पूजा करने वालों पर भगवान शिव की खास कृपा बनी रहती है और वे जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सावन महीना में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सात्विक भोजन करना चाहिए।
यही कारण है कि सावन ( Sawan 2019 ) महीने में बहुत से लोग मांस, मदिरा, प्याज आदि का सेवन बंद कर देते हैं। इन सब चीजों के अलावा और भी कई चीजें हैं, जिनका सेवन सावन माह ( month of sawan ) में नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं कि कौन सी ऐसी चीजे हैं, जिनका सावन महीने में सेवन नहीं करना चाहिए।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, सावन महीने में साग नहीं खाना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों कारण हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव को प्रकृति से बहुत प्रेम है। माना जाता है कि सावन महीने में प्रकृति को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। यही कारण है कि सावन महीने में साग-पात खाने से मना किया जाता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि साग तो सेहत के लिए लाभकारी होती है। अगर वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो सावन महीने में साग-पात में पित्त बढ़ाने वाले तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। यही कारण है कि सावन महीने हरी साग खाने से मना किया जाता है।
दूसरा कारण है कि सावन में बारिश का मौसम होता है। बारिश का मौसम होने के कारण कीट-पतंगों की संख्या बढ़ जाती है। इसके अलाना खेतों में कई तरह के घास-फूस भी उग आते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। अगर हम सावन महीने में साग खाते हैं तो उसके साथ मिलकर कई हानिकारक तत्व भी हमारे शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं।
यही नहीं, सावन महीने में दूध पीने से भी मना किया जाता है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि सावन महीने मवेशियों को जो चारा खिलाया जाता है, उसमें साग-पात भी होते हैं। साग-पाता खाने के कारण दूध में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है। जिसका सेवन करने के बाद हमारे शरीर में भी पित्त की मात्रा बढ़ने लगती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर सावन महीने में दूध का सेवन करना है तो उसे पहले अच्छी तरह से उबाल लें, तब ही सेवन करें।
सावन महीने में दूध से दही बनाकर सेवन कर सकते हैं। क्योंकि दही बनाने से पहले दूध को अच्छी तरह से उबाला जाता है, उसके बाद ही दही जमाया जाता है। इसके अलावा भादो यानी भाद्रपद में दही नहीं खाना चाहिए। कहा जाता है कि इस महीने में दही में वैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती है, जो हमारे सेहत के लिए हानिकारक होता है। भादो में आप दूध का प्रयोग कर सकते हैं।