
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में प्रस्तावित निर्माण कार्यों के मामले में नियम कानून ताक पर रख दिया गया है। नाली सहित अन्य दूसरे 50 लाख रुपए तक के निर्माण कार्यों के लिए बिना वर्क ऑर्डर जारी हुए कार्य शुरू किया जाना, इसका जीता जागता उदाहरण है।
अभी लिफाफा खोला जाना बाकी
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निर्माण कार्य के मद्देनजर निविदा जारी करने के साथ ही अन्य बाकी की प्रक्रिया की जा रही है लेकिन सूत्रों की माने तो अभी अभी ठेकेदारों से मिले कोटेशन के लिफाफे खोले जाने बाकी हैं। इसके बाद सबसे कम कोटेशन वाले ठेकेदार के नाम वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
बिना आदेश शुरू कर दिया गया काम
निर्माण कमेटी की बैठक नहीं हो पाने के चलते यह प्रक्रिया एक ओर जहां पूरी किया जाना बाकी है वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय में पूर्व से अन्य निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार ने वह कार्य भी शुरू कर दिया, जिसके लिए प्रक्रिया पूरी किया जाना बाकी है। इस आशय की शिकायत कुलपति तक पहुंच गई है। शिकायत में मामले की जांच कर कार्य रूकवाने की अपील की गई है।
गुणवत्ता को लेकर भी उठा सवाल
निर्माण कार्य के लिए मंगाई गई सामग्री भी दोयम दर्जे की है। इसके मद्देनजर कुलपति से की गई शिकायत में गुणवत्ता को लेकर भी संशय व्यक्त किया गया है। दरअसल निर्माण के लिए मंगाई गई सामग्री में बालू के स्थान पर डस्ट अधिक मात्रा में मंगाया गया है। जबकि निर्माण में डस्ट का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित है।
गुणवत्ता पर पहले भी उठी है उंगली
पूर्व में भी विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में उंगली उठ चुकी है। बाउंड्रीवाल निर्माण में बालू के स्थान पर डस्ट का प्रयोग किया गया था। इसकी शिकायत में बाद तत्कालीन कुलसचिव ने न केवल निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया था। बल्कि डस्ट के प्रयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया था। निर्माण कार्य में ठेकेदारों की इस मनमानी के चलते विश्वविद्यालय के अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा भी सवालों के घेरे में है।