
बीना. रिफाइनरी विस्तार के लिए एमपीआईडीसी ने भांकरई, आगासौद, दौनमड़ी, पुरैना और हांसुआ की करीब 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू की थी और किसानों को नोटिस दिए गए थे। किसानों को मांग के अनुसार मुआवजा न मिलने पर उन्होंने सहमति नहीं दी है, जिससे प्रक्रिया रूकी हुई है। इसके बाद रिफाइनरी के गेट नंबर एक तरफ जमीन अधिग्रहित की गई है।
रिफाइनरी के दूसरी तरफ इन ग्रामों से करीब पांच सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया उद्योग विभाग ने शुरू की थी, लेकिन मुआवजा राशि बहुत कम होने पर ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध कर रहे हैं। यहां के किसानों की मांग है कि उन्हें 50 लाख रुपए एकड़ मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा की व्यवस्था की जाए। इन गांवों के तीस से ज्यादा किसान ऐसे भी है, जिनकी पूरी जमीन जा रही है, जिससे सिर्फ उनके मकान बचेंगे। ग्रामीणों के विरोध के बाद भांकरई, पुरैना, हांसुआ की जमीन का अधिग्रहण रोक दिया गया है। पिछले दिनों रिफाइनरी में हुई बैठक के दौरान कलेक्टर ने भी जमीन अधिग्रहण को लेकर चर्चा की थी। गौरतलब है कि 2024 में जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी तब किसानों के अनुसार भांकरई में 6.64 लाख रुपए हेक्टेयर, दौनमणि में 9.76 लाख रुपए हेक्टेयर और पुरैना में 8 लाख रुपए हेक्टेयर मुआवजा मिलना तय हुआ था। इसके बाद 2025 में कलेक्टर गाइडलाइन में वृद्धि भी की गई थी।
38.16 हेक्टेयर जमीन का हो गया है अधिग्रहण
उद्योग विभाग ने रिफाइनरी के गेट नंबर एक तरफ जमीनों का अधिग्रहण किया है, यहां दाम ज्यादा होने से किसानों ने जमीन दे दी है। इसमें ग्राम बेरखेड़ी टांडा, विल्धई बुजुर्ग, आगासौद, बम्होरी केला शामिल हैं। इन ग्रामों में कुल 51.378 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है, जिसमें 38.16 हेक्टेयर जमीन लेकर बीपीसीएल को दी है। इन गांवों में जो जमीन शेष रही गई है उसकी भी प्रक्रिया चल रही है। यहां मुआवजा राशि ज्यादा होने के कारण ग्रामीण विरोध नहीं कर रहे हैं।
रुकी है अधिग्रहण की प्रक्रिया
अभी कुछ ग्रामों में जमीन अधिग्रहण रोक दिया गया है। आगे जो शासन से निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद उपाध्याय, मैनेजर, एमपीआईडीसी