दिग्विजय सिंह ने पंचायत सचिव को सौंपा अठारह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन, चक्काजाम की चेतावनी
बीना. पंचायती राज को मजबूत करने की दिशा में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सतौरिया ग्राम पंचायत सचिव शालिगराम को राष्ट्रपति के नाम 18 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। मांगें पूरी न होने पर 18 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में पंचायत स्तर पर चक्काजाम किया जाएगा।
ज्ञापन के माध्यम से मनरेगा को मूलरूप में लाने केन्द्र सरकार से सहयोग न मिलने पर राज्य की नई रोजगार गारंटी योजना बनाकर मजदूरी व सामग्री का भुगतान पारदर्शी करने, स्व-सहायता समूह के लाभार्थी सदस्यों को मनरेगा से जोड़कर हितग्राही मूलक योजनाओं को बढ़ावा देने, शासन ने ग्राम पंचायतों को 25 लाख रुपए के अधिकार दिए हैं, लेकिन तकनीकी स्वीकृति जिला स्तर से लेेने में परेशानी होती है, जो जनपद पंचायत स्तर पर ही की जाए और प्रशासनिक स्वीकृति का सरलीकरण किया जाए। कृषि के, रोजगार के नए अवसर निर्मित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव में सड़क योजना लागू करने, ग्राम पंचायत विकास निधि गठित कर सरपंच निधि बनाई जाए, जिससे जरूरत पडऩे पर अचानक कोई भी कार्य किए जा सकें, पंचायतों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने नई आर्थिक गतिविधियों के संचालन से जोड़े जाने, सरकारी कर्मचारियों की तरह सरपंचों का 20 लाख रुपए का जीवन बीमा और न्यूनतम पेंशन 2000 रुपए की जाए। 15 वें वित्त राशि की डीपीआर एक बार बनाकर उपयंत्री, सहायक यंत्री के हस्ताक्षर होने पर इसे की टीएस माना जाए, जिससे इसके नाम पर कमीशन नहीं देना पड़े, टाइड-अनटाइड व्यवस्था समाप्त करने राज्य और केन्द्र सरकर को प्रस्ताव भेजने, ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के अंतर्गत सरपंच को नोटिस मनरेगा के कार्यों में न देने, धारा 22 के अंतर्गत जनपद पंचायतों में बैठक रोस्टर के हिसाब से सरपंचों को नहीं बुलाया जाता है, इसके लिए सभी जनपदों को आदेशित करने, रोजगार सहायक व सचिव की सीआर लिखने का अधिकार सरपंच को होना चाहिए, उनका वेतन और अवकाश के अधिकार पूर्ण रूप से ग्राम पंचायत को दिए जाएं, रोजगार सहायक के स्थानांतरण की नीति जल्द लागू की जाए। पंचायतों में अधिकतम कार्यों की सीमा 20 को हटाया जाए, सीएम हेल्पलाइन पर झूठी शिकायत करने पर शिकायतकर्ता पर एफ.आइआर दर्ज करने, प्रधानमंत्री आवास व मुख्यमंत्री आवास प्रत्येक पंचायत में देने, सरपंच का मानदेय 15000 रुपए प्रतिमाह देने और जेम पोर्टल में कई विसंगतियां हैं, इस पोर्टल को बंद किए जाने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।