मर्ज बड़ा हो तो जांच रिपोर्ट वगैरह के कारण फाइल भी मोटी हो जाती है। ऐसे में यूनिक कोड से आपको फाइल ढोने से छुटकारा मिल जाएगा
सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज जल्द ही ई-हॉस्पिटल बन जाएगा। इसमें मरीज को पर्ची काउंटर पर यूनिक आईडी कोड दिया जाएगा। इस कोड के जरिए देश के किसी भी ई-हॉस्पिटल में डॉक्टर की कम्प्यूटर स्क्रीन पर बीमारी संबंधी जानकारी आ जाएगी।
एनआईसी से अनुबंध
बीएमसी ने नेशनल इन्फॉर्मेशन सिस्टम से अनुबंध किया है। इसमें प्रबंधन को ८० हजार रुपए खर्च आएगा। सॉफ्टवेयर इंस्टोलेशन का खर्च ही प्रबंधन को देना होगा। बीएमसी प्रदेश का तीसरा मेडिकल कॉलेज है, जहां यह प्रयोग किया जा रहा है।
ऐसा होगा ई-हॉस्पिटल का यूनिक कोड
यदि किसी मरीज को पेट में तकलीफ है और उसे मेडिसिन के डॉक्टर को दिखाना है। जब वह पर्ची काउंटर पर जाएगा तो उससे आधार नंबर पूछा जाएगा। आधार नंबर है तो मरीज की जानकारी कर्मचारी को मिल जाएगी। मरीज को सिर्फ विभाग का नाम बताना होगा। आधार नंबर नहीं है तो वह मोबाइल नंबर, नाम बताएगा। इसके बाद उसे जो पर्ची दी जाएगी, उसमें यूनिक कोड होगा। यह कोड मरीज के नाम से बीएमसी में दर्ज हो जाएगा। पहले चरण में रजिस्ट्रेशन काउंटर को डिजिटल किया जा रहा है।
दूसरे चरण में यह होगा
सभी वार्ड, क्लीनिक, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी व ब्लड बैंक सेंट्रल सर्वर से जुड़ जाएंगे।मरीज यदि पर्ची काउंटर पर जाएगा तो वहां कोड जनरेट होने के बाद संबंधित डॉक्टर कक्ष में उसकी जानकारी ऑटोमेटिक पहुंच जाएगी। मरीज को नंबर भी दिया जाएगा। इसके बाद यदि डॉक्टर जांच लिखता है तो उसकी जानकारी संबंधित पैथोलॉजी या फिर रेडियोलॉजी विभाग में पहुंच जाएगी। यहां भी उसे नंबर दिया जाएगा। नंबर आने पर मरीज का सैम्पल या एक्स-रे, सोनोग्राफी लिया जाएगा। भर्ती होने वाले मरीज को सीधे वार्ड में भर्ती किया जाएगा। वहां पर मरीज की सारी रिपोर्ट अपने आप पहुंच जाएगी।
तीसरा चरण
सेंट्रल सर्वर से जुडऩे के बाद तीसरे चरण में भर्ती मरीज को डिस्चार्ज होने पर एक कार्ड दिया जाएगा। इसमें एमआरडी नंबर दर्ज होगा। इस कार्ड में मरीज की पूरी फाइल होगी। यूनिक कोड से मरीज की हिस्ट्री सिर्फ डॉक्टर देख सकते हैं, लेकिन इस कार्ड के जरिए मरीज अपनी सारी रिपोर्ट देख सकता है।
मरीज को यह होंगे फायदे
यूनिक आईडी जनरेट होने पर मरीजों की वास्तविक संख्या का पता चल पाएगा। बार-बार रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। कोड के जनरेट होने पर मरीज दिल्ली एम्स में भी कोड दिखाकर इलाज करा सकता है।
यह डिजिटल इंडिया के तहत किया जा रहा है। प्रदेश में अभी इंदौर व भोपाल में शुरुआत हो रही है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। हमारे यहां पहले चरण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी।
डॉ. जीएस पटेल, डीन
आईपीडी और आेपीडी के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर को डिजिटल किया जा चुका है। दो बार ट्रेनिंग हो चुकी है। जल्द ही इसका शुभारंभ किया जाएगा।
डॉ. एसपी सिंह प्रभारी ई-हॉस्पिटल