तेज सर्दी में भगवान को ऊनी वस्त्र धारण कराए गए और भोग की थाली में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ और पेय अर्पित किए जा रहे हैं। रात में शयन के पहले केशर वाले दूध का भोग लगाया जा रहा है।
तेज सर्दी में भगवान को ऊनी वस्त्र धारण कराए गए और भोग की थाली में गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ और पेय अर्पित किए जा रहे हैं। रात में शयन के पहले केशर वाले दूध का भोग लगाया जा रहा है।
शहर में शनिवार को सुबह से कोहरा रहा। कडक़ड़ाती सर्दी का दौर शुरू होते ही मंदिरों में भी भगवान की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। बाजार में भी ठाकुरजी व राधारानी सहित अन्य देवी-देवताओं के ऊनी कपड़े बाजार में उपलब्ध हैं। बड़ा बाजार स्थित अटल बिहारी मंदिर देव द्वारकाधीश मंदिर, देव राघव मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, व धनेश्वर मंदिर सहित सभी मंदिरों में भगवान को शीतलहर से बचाने तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं।
बड़ा बाजार स्थित देव द्वारकाधीश मंदिर में सर्दी में देव द्वारकाधीश भगवान के भोग में बदलाव हुआ है। मंदिर समिति के शिवम सोनी ने बताया कि भोग में दाल-चावल, हरी सब्जी के बाजरा और मक्का की रोटी को शामिल किया जा रहा है। शाम को शयन कराने से पहले केशर का दूध मेवा मिष्ठान के साथ अर्पित किया जाएगा।
धनेश्वर मंदिर के पुजारी पं. पंकज पंडा ने बताया कि शीत ऋ तु का असर शिवालय में होने वाली नित्य पूजन में भी दिखने लगा है। प्रात: महादेव का गुनगुने जल से अभिषेक पंचामृत स्नान षोडश उपचार से पूजन शीत ऋ तु में गर्म पदार्थों का भोग लगाया जा रहा है। उसके बाद आरती होगी। ठंड से बचाव के लिए भगवान को गर्म साल शयन के साथ ओढ़ाया जाता है।