शहर में होली का पावन त्योहार भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण और भद्रा के संयोग ने तिथियों को प्रभावित किया है। सोमवार रात भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन किया गया, जबकि मंगलवार को ग्रहण के कारण रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। धुलंडी बुधवार को […]
शहर में होली का पावन त्योहार भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण और भद्रा के संयोग ने तिथियों को प्रभावित किया है। सोमवार रात भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन किया गया, जबकि मंगलवार को ग्रहण के कारण रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। धुलंडी बुधवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। शहर के प्रमुख चौराहों, कॉलोनियों और गली-मोहल्लों सहित 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ।
भीतर बाजार में आयोजित सबसे प्रसिद्ध होलिका दहन सबसे भव्य रहा। यहां होलिका की गोद में भक्त प्रहलाद की झांकी सजाई गई। आग लगते ही तार के सहारे प्रहलाद सुरक्षित निकल आए और होलिका धू-धू जल उठी। मौजूद भक्तों ने प्रहलाद महाराज की जय के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं ने होलिका की परिक्रमा की, ऊपर से काले उड़द उतारकर अग्नि में समर्पित किए और बुरी नजरों से रक्षा की कामना की। नगाड़ों की थाप पर युवा घंटों नाचे गुजराती समाज ने भगवानगंज में सामूहिक दहन किया।
धर्मश्री स्थित बालाजी मंदिर में रात 10.30 बजे होलिका दहन हुआ। दहन के बाद नारियल से सात बार उतारा कर भक्तों की नजर उतारी गई और नारियल होलिका में समर्पित किया। इसके साथ ही कटरा, राधा तिराहा, परकोटा, गोपालगंज, सुभाष नगर, बड़ा बाजार, काकागंज, लच्छू चौराहा, विजय टॉकीज, केशवगंज, लक्ष्मीपुरा, मोतीनगर, सिविल लाइंस, पुलिस लाइंस, सदर और मकरोनिया में उत्सव समितियां सक्रिय रहीं। होलिका पर ध्वज-पताका लगाकर पूजन किया गया।
कच्छ कड़वा पाटीदार समाज द्वारा भगवानगंज स्थित पाटीदार समाजवाडी परिसर में होली के उपलक्ष्य में होलिका दहन गुजराती परंपरा के अनुसार किया गया। समाज के अध्यक्ष अबजीभाई पटेल द्वारा पूर्ण विधि विधान से होलिका को प्रज्वलित किया गया। विगत 73 वर्षों से कच्छ कड़वा पाटीदार समाज होलिका दहन का आयोजन करता रहा है। समाज में एक साल से छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रज्वलित होलिका की गोलाकार सात फेरों की प्रदक्षिणा की जाती है। प्रदक्षिणा करते हुए बच्चों को दूल्हा की उपमा दी जाती है।
सोमवार की शाम से भद्रा काल शुरू हो गया। इसलिए कई स्थानाें पर दहन रात 12.50 बजे से 2.30 बजे तक पुच्छकाल में हुआ। मंगलवार को चंद्र ग्रहण के सूतक काल में कोई पूजा-विधि नहीं की जाती, इसलिए रंग खेलना टाला गया। धुलंडी बुधवार को होगी, जब युवा टोलियां और फाग मंडलियां नगाड़ों पर नाचते हुए मुख्य मार्गों पर निकलेंगी।
गुजराती बाजार, कटरा, सदर, बड़ा बाजार और मकरोनिया में रंग, गुलाल, पिचकारियों की दुकानें सजी रहीं। लोग खरीदारी में जुटे, वाहनों का जाम लगा। कई परिवारों ने पिकनिक के लिए सामान पहले ही जुटा लिया। परीक्षाओं के कारण कुछ बच्चों ने पहले ही रंग खेल लिया, लेकिन मुख्य उत्सव बुधवार को होगा।
ज्योतिष विद्वानों ने चंद्रग्रहण को लेकर स्थिति स्पष्ट कर की है। पुरोहित पुजारी विद्वत संघ के अध्यक्ष पं. शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि सोमवार को रात्रि 12.50 से 2.30 बजे तक भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन के बाद पूर्णिमा तिथि सायं 5.18 बजे से प्रारंभ होगी। इसी के साथ भद्रा भी लग जाएगी और रात्रि अंत तक विद्यमान रहेगी। पूर्णिमा मंगलवार को सायं 5 बजे तक रहेगी। मंगलवार को चंद्रग्रहण रहेगा, जो मोक्ष होते समय सिर्फ 30 मिनट के लिए रहेगा। सागर में स्थानीय समयानुसार शाम 6.18 बजे पर चंद्रोदय होगा और 6. 46 बजे पर ग्रहण का पूर्ण मोक्ष हो जाएगा। ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 9.31 बजे से लगेगा, इसके साथ ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे और शाम 6.50 बजे को ग्रहण मोक्ष उपरांत मंदिरों की सफाई धुलाई, स्थापित मूर्तियों के स्नान आदि होकर पोशाक बदली जाएंगी।