सागर

७२ में १२ गांव पूरी तरह से विस्थापित, शेष गांवों के लिए आए ४३३ करोड़ रुपए

नौरादेही अभयारण्य का मामलाविस्थापन की राशि कापेंच सुलझे तो ३० गांवों के लोग स्वयं ही कर रहे विस्थापन की मांगवन विभाग को सौंपा विस्थापित करने का प्रस्ताव

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Mar 05, 2019
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सागर. विस्थापन हमेशा से जोर-जबरदस्ती और डरा-धमका कर होता रहा है, लेकिन अब नौरादेही अभयारण्य में वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली का यह नतीजा निकला है, कि लोग स्वयं विस्थापित करने की मांग करने लगे हैं। विस्थापन की प्रक्रिया सरल होने और शासन द्वारा मुआवजे के रूप में मिलने वाली राशि को लेकर अभी तक चल रहे पेंच समाप्त होने के बाद यह बदलाव देखने को मिला है। यही कारण है कि बीते चार-पांच माह में अभयारण्य में बसे करीब ३० गांव ग्राम पंचायतों में प्रस्ताव पास कराकर वन विभाग को विस्थापित करने के लिए आवेदन कर चुके हैं। इसमें लोगों ने स्वयं ही गांव की और निवासरत लोगों की जानकारी बनाकर विभाग को सौंप दी है, अब केवल पात्र-अपात्र की जांच कर विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में बसे लोग इसलिए विस्थापित होना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें भी शासन की योजनाओं का लाभ आसानी से
मिल सके और वे भी विकास से
जुड़ सकें।
वनग्राम के लिए
वन विभाग ने वनग्राम यानी जिन्हें शासन द्वारा बसाया गया था उनके प्रत्येक व्यक्ति के दो बैंक खाते खुलवाए जाएंगे। जिसमें एक सिंगल बचत खाता होगा और एक बचत खाता कलेक्टर के साथ
ज्वाइंट होगा।
विस्थापन की तैयारी होते हुए व्यक्ति के खाते में एक लाख रुपए की राशि डाली जाएगी, जबकि तीन लाख रुपए की एक एेसी एफडी कराई जाएगी, जिससे हर माह आय हो और यह तीन साल के लिए होगी। शेष छह लाख रुपए कलेक्टर के साथ ज्वाइंट खाते में रहेंगे, जैसे ही व्यक्ति विस्थापन के बाद मकान
या जमीन खरीदेगा वह पूरी राशि उसके सिंगल बचत खाते में डाल
दी जाएगी।
राजस्व ग्राम के लिए यहां विभाग ने दो विकल्प दिए हैं। जिसमें यदि प्रति यूनिट दस लाख रुपए का प्रस्ताव पंचायत द्वारा बनाकर दिया जाता है तो एक बार में ही पूरी राशि व्यक्ति के खाते में डाल दी जाएगी। यहां पर हर वयस्क एक यूनिट माना गया है, लेकिन यदि किसी २१ साल के युवक की शादी हो चुकी है तो उसे व उसकी पत्नी को एक यूनिट माना जाएगा। दूसरे विकल्प में यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन, मकान, अन्य एसिस्ट का मूल्यांकन कराता है तो फिर उसका निर्धारण कलेक्टर द्वारा किया जाएगा और कीमत का मूल्याकंन के अनुसार उसे राशि दी जाएगी।
&पहले मुआवजे की राशि निकालने में उलझने थीं, लोगों को खुद का पैसा निकालने के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी होती थी, जिसे बदल दिया गया है। अब लोग स्वयं विस्थापित होने के लिए आवेदन कर रहे हैं, एेसे करीब ३० गांवों से आवेदन आए हैं।
डॉ. अंकुर अवधिया, डीएफओ, नौरादेही
यह है स्थिति
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक अभयारण्य में बसे ७२ गांव में से २५ गांव को विस्थापन करने व्यय होने वाली राशि कलेक्टर के खाते में पहुंच चुकी है। यह राशि किश्तों में आई है, बताया जा रहा है कि वर्तमान में कलेक्टर के खाते में करीब ४३३ करोड़ रुपए है। विस्थापन की प्रक्रिया में अब तक १२ गांव पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं, जबकि दो और गांव वालों के बैंक खातों में विस्थापन की राशि पहुंच चुकी है।

Updated on:
05 Mar 2019 01:40 am
Published on:
05 Mar 2019 10:00 am
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