
जिले में मार्च के महीने में राजस्व विभाग से जुड़ी प्रतिदिन करीब 30 शिकायतें दर्ज हुईं। मार्च की लंबित शिकायतों के आंकड़ों में जिले भर की 16 तहसीलों में कुल 964 शिकायतें लंबित पाई गईं हैं। इनमें सबसे अधिक 869 शिकायतें सीधे राजस्व विभाग से संबंधित हैं, जबकि सीमांकन के 62, प्राकृतिक प्रकोप राहत राशि के 25 और खसरा-खतौनी के 8 मामले लंबित हैं। राजस्व विभाग से ही जुड़े किसान सम्मान निधि भुगतान न मिलने की शिकायतें भी सबसे ज्यादा 94 दर्ज की गईं।
सागर तहसील में 156 लंबित शिकायतों के साथ जिले में पहले स्थान पर है। यहां राजस्व विभाग के 132, सीमांकन के 16, प्राकृतिक प्रकोप राहत राशि के 6 और खसरा-खतौनी के 2 मामले लंबित हैं, जबकि मकरोनिया बुजुर्ग में कुल 5 शिकायतें लंबित पाईं गईं हैं।
जिले में सबसे ज्यादा शिकायतें नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, कब्जा विवाद और अन्य राजस्व प्रकरणों से जुड़ी हैं। सीमांकन के 62 लंबित मामलों से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद बढऩे की आशंका बनी हुई है। हर वर्ष की तरह फसल की कटाई होते ही ग्रामीणों क्षेत्रों में जमीन संबंधी विवाद बढ़ जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए पिछले वर्ष प्रशासन ने पक्षकारों के बीच बॉन्ड साइन कराने के निर्देश भी दिए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तहसील स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा कर शिकायतों का निराकरण किया जाए तो आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। सबसे अधिक शिकायतें किसानों और जमीन विवादों से जुड़ी होने के कारण राजस्व अमले की जवाबदेही भी बढ़ गई है। तहसील स्तर पर सक्रियता से कार्य हो, तो जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में और ज्यादा कसावट आएगी।
सोमवार को बैठक में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि राजस्व प्रकरणों में तहसीलदार और एसडीएम की जवाबदेही तय होगी। नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के मामले समय-सीमा से बाहर नहीं जाने चाहिए। यदि राजस्व प्रकरण समय-सीमा के बाद लंबित पाए जाते हैं, तो संबंधित तहसीलदार पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। आरसीएमएस पोर्टल पर कोई भी केस ओवरड्यू न हो।