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तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस रहा, मौसम की लोकल एक्टिविटी से शाम को छा गए बादल

The temperature was 43.7 degrees Celsius, and local weather activity brought clouds into the evening.

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सागर

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Rizwan ansari

Apr 28, 2026

प्रति चक्रवात का असर बना रहने के कारण सोमवार को भी आसमान से आग बरसती रही। सुबह से चिलचिलाती धूप के कारण दोपहर में तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दोपहर में शहर की सड़कें वीरान रहीं। गनीमत रही कि लोकल एक्टिविटी के कारण जमीन से ऊपर पहुंची नमी के कारण बादल छा गए। बादलों से तीखी धूप से तो राहत मिली लेकिन उमस के कारण लोग हलाकान रहे। वहीं मौसम वैज्ञानिक डॉ. विवेक छलोत्रे ने बताया कि अगले चार दिन तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है, जिसमें तापमान 42-44 डिग्री तक बने रहने की आशंका है। महीने के अंत में तापमान 1-2 डिग्री गिरने की संभावना है। उत्तर पश्चिमी हवाओं के कारण क्षेत्र में भीषण गर्मी हो रही है।

इसलिए हो रहे बादल

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि जब भी तेज गर्मी पड़ती है तो हीटिंग की वजह से जमीन की नमी वाष्पीकरण के कारण जमीन से उठकर ऊपर चली जाती है। आसमान में बादल का रूप ले लेती है और कभी-कभी बूंदाबांदी के रूप में वापस जमीन पर आती है। क्षेत्र में अभी यही लोकल एक्टिविटी हो रही है, जिससे दिन में तो मौसम साफ रहता है और तीखी धूप हो रही है, लेकिन शाम को आसमान में बादल छा रहे हैं।

मई की शुरुआत में बदलेगा मौसम

महाराष्ट्र क्षेत्र में सक्रिय प्रति चक्रवात यानि एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर बुंदेलखंड क्षेत्र में बना हुआ है। यह अप्रेल के अंत तक बना रह सकता है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ के असर के कारण मई की शुरुआत में मौसम बदलने की संभावना है। इस दौरान क्षेत्र में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना भी जताई जा रही है।

गर्मी के तेवर लगातार तीखे बने हुए हैं। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पर्यटन नगरी खजुराहो में अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, नौगांव में भी गर्मी का प्रकोप जारी रहा, यहां अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिन की शुरुआत भीषण गर्मी के साथ हुई। दोपहर होते-होते सड़कें सूनी नजर आने लगीं। लेकिन शाम 4 बजे के बाद बादलों की आवाजाही शुरू हुई और हल्की बौछारें गिरीं। बारिश के कारण वातावरण में गर्मी दबने के बजाय उमस में बदल गई, जिससे घरों के अंदर पंखे और कूलर भी बेअसर साबित होने लगे।