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नरवाई प्रबंधन के दावे फेल: हर दिन लग रही आग से हो रहे बड़े नुकसान

महंगे संसाधनों के चलते किसान नहीं कर पा रहे उपयोग, जिन यंत्रों की मांग उनपर सरकार नहीं दे रही अनुदान, महंगे यंत्र खरीद पा रहे गिनेचुने किसान, नरवाई प्रबंधन को लेकर जिम्मेदार नहीं गंभीर

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Claims of stubble management fail: Daily fires cause huge losses

नरवाई में लगी आग। फोटो-पत्रिका

बीना. क्षेत्र में इस वर्ष नरवाई प्रबंधन को लेकर प्रशासन के तमाम दावे जमीनी हकीकत में कमजोर साबित हो रहे हैं। गेहूं कटाई से पहले किसानों को जागरूक करने और आधुनिक यंत्रों के उपयोग की सलाह दी गई थी, लेकिन महंगे उपकरणों के कारण अधिकांश किसान इन्हें अपना नहीं सके। नतीजतन खेतों में नरवाई जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
क्षेत्र में जिन खेतों में गेहूं की बोवनी हुई थी, उनमें खड़ी नरवाई जलाई जा रही है या फिर अज्ञात कारणों से आग लग रही है। नरवाई की आग के कारण क्षेत्र में बड़े नुकसान भी हो चुके हैं। कहीं घर जलकर खाक हो गए, तो कहीं लोगों के कृषि यंत्र जल गए हैं। कई जगहों पर शॉर्ट सर्किट से भी नरवाई में आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं। गौरतलब है कि शुरूआत में ही जागरूक किसान सौरभ आचवल ने सीएम, कृषि मंत्री और कलेक्टर से मांग की थी कि पराली प्रबंधन के लिए कारगर यंत्र, जो अन्य यंत्रों से सस्ते हैं, उनपर अनुदान दिया जाए। क्योंकि महंगे यंत्र जो किसान अनुदान पर भी नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है। सस्ते संसाधन उपलब्ध होने पर ही इस समस्या को हल किया जा सकता है।

जान-माल का बड़ा नुकसान
हाल ही में महेरा गांव में नरवाई की आग से एक मकान पूरी तरह जलकर खाक हो गया, जिसमें घर का सारा सामान भी नष्ट हो गया। तीन बछड़े भी आग में लग गए थे। सी तरह खुरई के आसोली घाट में भी आग से एक घर जल गया। बुखारा, मुडिय़ा नायक सहित कई अन्य क्षेत्रों में भी आग से कृषि यंत्रों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

नरवाई की आग से होने वाले नुकसान
नरवाई में आग लगने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व और लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं, फायदेमंद जीव केंचुए व अन्य सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। साथ ही धुआं निकलने से वायु प्रदूषण फैलता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, सांस, आंख और एलर्जी की समस्या बढ़ती है। साथ ही आग लगने से घर और संपत्ति तक नुकसान हो सकता है। साथ ही जान—माल का नुकसान भी होता है।