क्या आपने इ-सिम के बारे में सुना है? जानिए कैसे अलग है ये नॉर्मल सिम से
eSIM पिछले कुछ दिनों से ये नया नाम खूब चर्चा में है। आपने भी हाल ही में इ-सिम के बारे में शायद सुना हो और सोच रहे हों कि आखिर नई तरह की ईसिम है क्या? भारत में ऐपल वॉच सीरीज 3 पहली स्मार्ट डिवाइस है जिसमें इ-सिम का इस्तेमाल किया गया है।
*********************************
सागर. eSIM के बारे में विस्तृत जानकारी सागर और बुंदेलखंड के लोगों तक पहुंचे। इसके लिए हमने नेटवर्क कंपनी के अधिकारी और एक्सपर्ट महेश सिंह से चर्चा की। इन्होंने MP.PATRIKA.COM के पाठकों के लिए इ-सिम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। महेश सिंह ने बताया कि आने वाले समय में हम देख सकते है कि फोन्स और नेटवर्क में इलेक्ट्रॉनिक सिम Cards का इस्तेमाल किया जाए। यानी फिज़िकल सिम कार्ड की जरूरत खत्म हो जाएगी। ऐपल ने भारत में अपनी ऐपल वॉच सीरीज़ 3 में eSIM कनेक्टिविटी देकर एक नई शुरुआत की है।
जियो और एयरटेल के विवाद के बाद डॉट (डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम) की गाइडलाइंस के मुताबिक, 'मशीन टू मशीन लर्निंग (एमटूएम) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) को लाने के लिए ऐम्बेडिड सब्सक्राइबर आईडेंटिटी मॉड्यूल (इ-सिम) के इस्तेमाल की अनुमति देने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्पेसिफिकेशंस और स्टैंडर्ड के साथ सिंगल और मल्टीपल प्रोफाइल पर ओवर-द-एयर सबस्क्रिप्शन अपडेट की सुविधा मिलेगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ईसिम टेक्नालॉजी है क्या और इसके फोन, स्मार्टवॉच या टैबलेट के लिए इसके क्या मायने हैं? आज हम आपको नई सिम टेक्नॉलजी के बारे में सब कुछ बताएंगे।
जानिए इ-सिम के बारे में
एक्सपर्ट महेश सिंह बताते है कि इ-सिम का संबंध एक नए स्टैंडर्ड से है जिसे जीएसएमए द्वारा प्रमोट किया गया है। एक असोसिएशन है जो दुनियाभर के नेटवर्क ऑपरेटर्स को रिप्रजेंट करता है। यह एक इंटिग्रेटेड सिम के तौर पर डिवाइस में आती है और इसे डिवाइस से अलग नहीं किया जा सकता। यह एक इंटिग्रेटिड ईसिम है और इसे औपचारिक तौर पर ऐम्बेडिड यूनिवर्सल इंटिग्रेटिड सर्किट कार्ड के तौर पर जाना जाता है। इसकी लंबाई सिर्फ 6 मिलीमीटर और चौंड़ाई 5 मिलीमीटर है और इसे मैन्युफैक्चरिंग के समय ही डिवाइस के मदरबोर्ड में लगाया जाता है और यह आम रिमूवेबल सिम वाले सारे काम कर सकती है। इसमें मशीन टू मशीन और रिमोट प्रोविज़निंग क्षमताएं हैं।
जानिए कैसे अलग है ये नॉर्मल सिम से
इ-सिम में रिमोट प्रोविज़निंग क्षमता के चलते यूजर को ऐक्टिवेशन और फोन मैनेज करने के समय बेहतर कस्टमर एक्सपीरियंस मिलता है। फोन की सेटिंग में जाकर यूजऱ ऑपरेटर और प्लान चुन सकते हैं। 2016 में सबसे पहले सैमसंग गियर एस 2 3जी में इ-सिम का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन ऐपल वॉच 3 के जरिए ईसिम टेक्नॉलजी स्पॉटलाइट में आई। गूगल पिक्सल 2 स्मार्टफोन में भी ईसिम का इस्तेमाल किया गया है। इ-सिम का सबसे बड़ा फायदा है इसका साइज़। यह एक नैनो सिम के भी छोटे टुकड़े की तरह है। अपने साइज़ के चलते यह अल्ट्रा-कॉम्पेक्ट गैजेट्स जैसे वॉच में आसानी से फिट हो जाती है क्योंकि ऐसी डिवाइसेज़ में एक नॉर्मल सिम के लिए जगह नहीं होती। यानी डिवाइस ज्यादा कॉम्पेक्ट होंगे।
आसानी से स्विच होगा स्थानीय नेटवर्क
इ-सिम का सबसे बड़ा फायदा है कि आप एक नए ऑपरेटर पर स्विच कर सकते हैं और इसके लिए आपको नया सिम कार्ड लगाने की जरूरत नहीं होगी। एक और फायदा होगा कि आप अगर यात्रा कर रहे होंगे तो स्थानीय नेटवर्क पर स्विच करना इ-सिम के जरिए आसान हो जाएगा। यानी यहां सब कुछ सॉफ्टवेयर के जरिए संभव होगा। भारत में ऐपल वॉच 3 को एयरटेल ईसिम के साथ बेच रही है। इ-सिम उन लोगों के लिए जरूरी है जो दो गैजेट्स जैसे स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच पर एक ही फोन नंबर का इस्तेमाल करना चाहते हैं। दूसरी डिवाइस के न होने पर भी एक डिवाइस से कॉल करना संभव होता है।
फिज़िकल SIM कार्ड और eSIM कार्ड
पहली बात कि अगर अभी आप अपना नेटवर्क बदलते हैं तो आपको टेलिकॉम ऑपरेटर के स्टोर पर जाकर नया सिम कार्ड लेकर उसके ऐक्टिवेशन तक इंतज़ार करना होता है। लेकिन इ-सिम होने पर आपको ऑपरेटर स्टोर नहीं जाना होगा, बस कस्टमर केयर से बात करनी होगा और यहां से मिली एक यूजऱ आईडी व पासवर्ड के जरिए आपका नया नेटवर्क एक्टिव हो जाएगा।
फिज़िकल सिम कार्ड को बार-बार बदलने में लगने वाला समय बचेगा। ईसिम कार्ड में यह वक्त बच जाएगा और यह ज्यादा सुरक्षित भी होगी।
अभी डिवाइस बदलने पर आप अपने सिम कार्ड को भी पुराने से नई डिवाइस में लगाते हैं। लेकिन इ-सिम आने पर आपको कुछ बदलना नहीं होगा बस यूजऱ आईडी और पासवर्ड से ही सारा काम हो जाएगा।
कुछ ऐसा हो सकता है eSIM का भविष्य
बात करें आने वाले समय की तो न केवल स्मार्टवॉच बल्कि एक दिन सभी फोन में हो सकता है कि ईसिम कार्ड का ही इस्तेमाल हो। जीएसएमए ने इस नई तरह की सिम के लिए एक स्टैंडर्ड का ऐलान भी किया है। सैमसंग और ऐपल के अलावा वोडाफोन समेत कई दूसरे ऑपरेटर भी इस तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया में हैं। अभी स्टैंडर्ड सिम में स्टोर होने वाले नेटवर्क डेटा को भविष्य की ईसिम डिवाइसेज़ में रीराइट किया जा सकेगा। यानी बस एक या दो फोन कॉल और आप अपने नेटवर्क ऑपरेटर को बदल पाएंगे। फिजिकल सिम काड्र्स के साथ एक और समस्या है कि यह अभी दो या तीन साइज़ में आती है। यानी कोई भी डिवाइस इस्तेमाल करेंगे चाहें आईफोन या ऐंड्रॉयड, इ-सिम कार्ड के साथ सिम स्लॉट के साइज़ जैसी कोई समस्या नहीं होगी।