सागर

AFFILIATION के फेर में 27 कॉलेजों को नैक की ‘नो’

छतरपुर विवि के अभी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आने के कारण बनी स्थिति
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Updated: 26 Oct 2017, 9:30 PM IST
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सागर. राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन के दायरे में सागर संभाग के 27 सरकारी कॉलेज नहीं आते हैं। इस वजह से इन्हें ग्रेडिंग के आधार पर दी जाने वाली अनुदान राशि से वंचित होना पड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह इन कॉलेजों को महाराजा छत्रसाल विवि से स्थाई सम्बद्धता न मिलना है।

डॉ. हरिसिंह गौर विवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद अब यह कॉलेज छतरपुर विवि के अधीन हैं। संभाग में ४८ सरकारी कॉलेज हैं। इसमें मकरोनिया कॉलेज हाल ही में शामिल किया गया है। 21 कॉलेजों में से 9 को विवि ने स्थाई संबद्धता तो दे दी है, लेकिन नैक ने इन कॉलेजों में निरीक्षण नहीं किया है। जानकारी के अनुसार इन कॉलेजों ने सेल्फ स्टडी रिसर्च (एसएसआर) और एलओआई (लिस्ट ऑफ इंडेंट) की जानकारी नैक को भेज दी है और निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया है। यह मांग इसी साल की गई है।

लग सकता है समय
छतरपुर विवि अभी पूरी तरह अपने अस्तित्व में नहीं आ पाया है। इससे संबद्ध होने के लिए 27 कॉलेजों को इंतजार करना पड़ सकता है। जानकारों की मानें तो इसमें अभी डेढ़ से दो साल तक का वक्त लग सकता है। हालांकि संबद्धता की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

12 कॉलेजों को नैक ने दी है ग्रेडिंग
महाविद्यालय - वर्ष - ग्रेड
अग्रणी कॉलेज सागर 2017 सी
महाविद्यालय बंडा 2017 बी
पीजी कॉलेज दमोह 2017 बी
केएन कॉलेज दमोह 2017 बी +
कन्या महाविद्यालय टीकमगढ़ 2017 सी
छत्रसाल पीजी कॉलेज पन्ना 2017 बी +
कन्या महाविद्यालय बीना 2016 बी
महाराजा महाविद्यालय छतरपुर 2016 बी
शासकीय महाविद्यालय निवाड़ी 2016 बी
कन्या डिग्री कॉलेज सागर 2015 ए
महाविद्यालय बीना 2015 बी
पीजी कॉलेज टीकमगढ़ 2015 बी

यहां होना है निरीक्षण
शासकीय स्नातकोत्तर देवरी
शासकीय स्नातक महाविद्यालय रहली
शासकीय महाविद्यालय खुरई
छतरपुर कन्या महाविद्यालय
शासकीय महाविद्यालय लवकुशनगर
शासकीय महाविद्यालय महाराजपुर
शासकीय महाविद्यालय हटा
शासकीय कन्या महाविद्यालय पन्ना
शासकीय महाविद्यालय पबई

नैक के मूल्यांकन के लिए 27 कॉलेज पात्र नहीं है। विवि से संबद्धता न होने से यह स्थिति है। प्रक्रिया चल रही है। मान्यता मिलने के बाद इन कॉलेजों को एसएसआर और एलओआई रिपोर्ट नैक को भेजनी होगी।
डॉ. आरके गोस्वामी, विशेष कर्तव्य अधिकारी

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