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मोतीचूर नदी को बीना नदी परियोजना से जोड़ने की मांग, जिससे वर्ष भर रहेगा पानी

विभिन्न मांगों को लेकर समिति ने सौंपे अलग-अलग ज्ञापन, पार्क में रात के समय असामाजिक तत्वों का लगा रहता है जमावड़ा, चौकीदार नियुक्त करने और पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग
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Demand to link the Motichur River with the Bina River project, which would ensure water availability throughout the year

मोतीचूर नदी। फोटो-पत्रिका

बीना. मां मोतीचूर नदी जल एवं पर्यावरण संरक्षण समिति ने बुधवार को मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मोतीचूर नदी को बीना नदी परियोजना में जोड़ने की मांग की है, जिससे वर्ष भर पानी रह सके।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम बम्होरी शेख से मोतीचूर नदी प्रारंभ हुई है, जो बीना से निकली है। नदी का प्रमुख घाट बड़ा मंदिर के पास स्थित है, जहां नगर पालिका द्वारा सौंदर्यीकरण कराया गया है। नदी पर प्रतिमाओं, जवारों का विसर्जन होता है और पितृपक्ष के समय लोग तर्पण करते हैं, लेकिन वर्षाकाल के बाद कुछ दिनों में ही पानी खत्म हो जाता है। यदि इस नदी को बीना नदी परियोजना से जोड़ा जाता है, तो नदी में वर्ष भर पानी रहेगा। साथ ही किसानों के लिए सिंचाई को पानी मिलने लगेगा।

गंदे नालों का पानी रोकने की मांग


समिति ने दूसरा ज्ञापन नपाध्यक्ष, एसडीएम, सीएमओ को सौंपकर मोतीचूर नदी में बीना शहर के गंदे पानी के कई नाले जाकर मिलते हैं और नदी के पानी को प्रदूषित करते हैं। साथ ही नगर पालिका द्वारा अवशिष्ट पदार्थ एवं कचरा डाला जाता है, इससे नदी का पानी प्रदूषित होता है। नदी को स्वच्छ रखने के लिए शहर से निकलने वाले नाले-नालियों को सीवरेज लाईन के द्वारा अलग किया जाए। साथ ही आगासौद रोड पर नदी किनारे मृत मवेशी फेंके जा रहे हैं, गंदगी फेंकी जा रही है इसपर तत्काल रोक लगाई जाए।

ठेकेदार की लापरवाही से चोरी हो गए खंभे


वहीं, एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में समिति ने उल्लेख किया है कि श्री कटरा मंदिर से श्री देवरघुनाथ बड़ा मंदिर तक सडक़ के दोनों ओर सुंदरता एवं भव्यता बढ़ाने के उद्देश्य से आकर्षक पोल सहित लाइट लगाई गई थीं। समिति के कहने के बाद भी खंभे लगाते समय ठेकेदार ने लापरवाही बरती है, जिससे 28 अगस्त की रात 15 खंभा चोरी चले गए। इसके बाद से लगातार खंभे चोरी हो रहे हैं। इस संबंध में पूर्व में सीएमओ को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। नदी पर नए घाट और पार्क में चौकीदार न होने से रात में असामाजिक तत्व एकत्रित हो जाते हैं, जिससे लोगों को परेशानी होती है। पचास लाख रुपए की लागत से कार्य हुआ है, लेकिन ठेकेदार ने लापरवाही बरती है, जिससे घाटों के पत्थर उखड़ रहे हैं और प्लास्टर उखड़ रहा है, जिसकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही रात में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।