सागर

न तो पुस्तक लग रहा और न स्कूलों की मनमानी पर नियंत्रण कर रहा प्रशासन

मनमाने दामों पर बिक रहीं पुस्तक और गणवेश, अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ, स्कूल संचालक आदेशों का भी नहीं कर रहे पालन

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Mar 29, 2026
स्टेशनरी पर लगी अभिभावकों की भीड़। फोटो-पत्रिका

बीना. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अगले माह से होने वाली है और इसके लिए निजी स्कूल संचालकों ने पुस्तक और गणवेश की बिक्री शुरू करा दी है। निजी स्कूलों की मनमानी के लिए जिला मुख्यालय पर पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है, लेकिन यहां न मेला लग रहा है और न ही निगरानी की जा रही है।
हर सत्र में नई पुस्तकें अभिभावकों को खरीदनी पड़ती हैं और इसके लिए निजी स्कूल संचालक दुकानें निर्धारित कर देते हैं। पुस्तकों के साथ-साथ गणवेश भी स्कूल के अनुसार की तय होती है और दाम भी निर्धारित कर दिए जाते हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अभिभावकों को राहत दिलाने जिला मुख्यालय पर पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है, लेकिन ब्लॉक स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि बीना ब्लॉक में पचास से ज्यादा निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं।

2800 रुपए में आ रहीं यूकेजी की पुस्तकें
एक अभिभावक ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं, एक यूकेजी और दूसरा चौथी कक्षा में पढ़ता है। यूकेजी की पुस्तकों का सेट 2800 रुपए में आया है और कक्षा चौथी का 3600 रुपए का है। यह दाम स्कूल से ही तय किए गए हैं और स्टेशनरी से इनकी बिक्री हो रही है। वहीं, एक अन्य निजी स्कूल की पहली कक्षा का सेट करीब 2000 रुपए में आ रहा है। स्कूल संचालकों के स्टेशनरी पर सख्त निर्देश रहते हैं कि पुस्तकों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में जल्द से जल्द पुस्तक मेला आयोजित किया जाए।

स्कूलों के बाहर सूची चस्पा करने के हैं आदेश
कलेक्टर के आदेश हैं कि निजी स्कूल संचालकों को स्कूल के बाहर पुस्तकों की सूची, दुकानों के नाम आदि जानकारी चस्पा करना है, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालक आदेशों का पालन नहीं करते हैं।

मेले के संबंध में नहीं आए आदेश
नगर में पुस्तक मेला लगाने संबंधी कोई निर्देश नहीं आए हैं, लेकिन टीम लगातार निरीक्षण करेगी, जिससे अभिभावकों को परेशानी न हो। साथ ही यह ध्यान रखा जा रहा है कि एक दुकान से पुस्तक गणवेश न बेची जाएं।
नीतेश दुबे, बीइओ, बीना

Published on:
29 Mar 2026 12:07 pm
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