125 गंभीर टीबी मरीजों के लिए सिर्फ एक डॉक्टर, उसी पर जिला क्षय केंद्र का प्रभार
सागर. टीबी अस्पताल में इन दिनों एक भी टीबी विशेषज्ञ नहीं है। न ही मेडिकल ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। इसका सबसे बुरा असर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंट) एमडीआर केंद्र के मरीजों पर पड़ रहा है। यहां उन मरीजों का उपचार होता है, जिनकी बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। इनके द्वारा साधारण टीबी के मर्ज का पूरा कोर्स नहीं किया गया था। इस वजह से अब टीबी इनके लिए जानलेवा हो गई है। केंद्र में टीबी स्पेशलिस्ट न होने से एेसे मरीजों का उपचार भगवान भरोसे चल रहा है। उधर जिला क्षय केंद्र में सिर्फ डॉ. सुनील जैन ही हैं। वे भी एमबीबीएस हैं। यहां मेडिकल ऑफिसर की पोस्ट खाली पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि डॉ. जैन के पास ही जिला क्षय केन्द्र का भी प्रभार है। एेसे में टीबी अस्पताल कुल मिलाकर भगवान भरोसे ही चल रहा है।
वर्तमान में एमडीआर में 125 मरीजों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें सागर के अलावा अन्य जिलों के मरीज भी हैं। इनके उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हालही में एक संविदा डॉक्टर की नियुक्ति की है। इनके द्वारा खकार की जांचें ही की जा रही है।
जागरुकता की कमी
सैकड़ों मरीज चिकित्सीय सलाह के अनुसार छह महीने तक अपना कोर्स पूरा नहीं करते हैं। एेसे में इनकी टीबी गंभीर रूप ले लेती है। १२५ मरीज एेसे हैं, जिनकी टीबी बिगड़ चुकी है। यदि यह ढाई साल तक नियमित दवाएं नहीं खाएंगे तो इनका बचना मुश्किल है।
03 हजार मरीजों में मिले टीबी के लक्षण
125 मरीजों की हालत बड़ी गंभीर
चार पद हैं खाली
जिला क्षय केंद्र
मेडिकल ऑफिसर 01 पद (रिक्त)
जिला क्षय अस्पताल
टीबी स्पेशलिस्ट- 01 पद (रिक्त)
मेडिकल ऑफिसर- 01 पद (रिक्त)
संविदा डॉक्टर- 02 पद (1 रिक्त)
ये डॉक्टर हुए कम
हाल ही में जिला क्षय अस्पताल में तैनात टीबी विशेषज्ञ डॉ.डीके पिप्पल सेवानिवृत्त हो गए हैं, वहीं डॉ. तला साध ने इस्तीफा दे दिया है।
चिकित्सकों की कमी के लिए शासन स्तर पर प्रपोजल भेजा है। संविदा चिकित्सक की नियुक्ति की गई है।
डॉ. इंद्राज सिंह, सीएमएचओ