बाजार क्षेत्र में रहने वाले मेहता परिवार की कई पीडिय़ों से भैयाजी वैद्य काली की स्थापना करता चला रहा है। मां के आगमन से उनके विसर्जन तक पूरा शहर भक्ति में डूबा रहा है।
बाजार क्षेत्र में रहने वाले मेहता परिवार की कई पीडिय़ों से भैयाजी वैद्य काली की स्थापना करता चला रहा है। मां के आगमन से उनके विसर्जन तक पूरा शहर भक्ति में डूबा रहा है। सागर की कंधे वाली काली में शुमार ये प्रतिमा शहर की तीसरी सबसे प्राचीन प्रतिमा हैं। भैयाजी वैद्य काली के सामने ही मोहन नगर वार्ड में पालकी वाले राजा की स्थापना की जा रही है। पिछले 8 वर्षों से यहां भगवान गणेश स्थापना हिंदू संगठन बाल गणेश समिति करती है। 35 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। समिति के निखिल सोनी ने बताया कि वार्ड में वर्षों पहले से भैया वैद्य काली की स्थापना की जाती है। सभी वार्ड के लोग काली के दर्शनों के पहुंचते हैं। प्रतिदिन माता के अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन होते हैं। 8 वर्ष पहले माता के सामने गणेश भगवान को स्थापित करने की पहल परिवार के लोगों ने की। अब समिति बड़े उत्साह के साथ हर वर्ष पालकी वाले गणेश की स्थापना करती है। नवरात्रि के साथ अब गणेश उत्सव में भी यहां भक्तों की भक्ति देखते ही बनती है।
निखिल सोनी ने बताया कि भैयाजी वैद्य की तरह ही पालकी में विराजमान करके गणेश प्रतिमा को विसर्जन के किया जाता है। भक्त कंधे पर पालकी उठाकर विसर्जन के लिए जाते हैं। प्रतिमा का विसर्जन चकराघाट में किया जाता है। मोहननगर वार्ड से भक्त पालकी लेकर दौड़ते हुए चलते हैं। जय-जय गणेश के जयकारों के साथ प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया है। प्रतिमा सिंहासन पर विराजमान होती है।
हिंदू संगठन बाल गणेश समिति यहां 10 दिनों तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है। युवा का डमरू दल आरती करता है। महाआरती, भजन संध्या सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। निखिल ने बताया कि शाहगढ़ के कलाकार आकर पंडाल का निर्माण करते हैं। पंडाल की ऊंचाई करीब 35 फीट होती है। 10 दिन तक भक्त गणेश भगवान की सेवा में लीन रहते हैं।