तपोवन जैन तीर्थ बहेरिया में शनिवार को घटयात्रा व ध्वाजारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हो गई।
तपोवन जैन तीर्थ बहेरिया में शनिवार को घटयात्रा व ध्वाजारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत हो गई। पंचकल्याणक को आत्मकल्याण का मार्ग माना जाता है, जिसमें गर्भ, जन्म, दीक्षा, केवल ज्ञान व मोक्ष कल्याणक मनाया जाता है। तीर्थंकर बालक के जन्म लेने से 6 माह पूर्व से इंद्र रत्नों की वर्षा शुरु कर देते हैं। धर्मसभा में आचार्य निर्भय ने कहा कि जैन धर्म का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव नकली नहीं होता बल्कि भगवान के असली पंचकल्याणक की फोटोकॉपी की तरह नकल होती है, जो साक्षात भगवान की पंचकल्याणक का फल देता है। इस आयोजन के माध्यम से सृष्टि की रचना, मानव का उत्थान और प्रत्येक संसारी आत्मा परमात्मा कैसे बनती है यह संस्कार सहित प्रायोगिक क्रिया विधि बताई जाती है। ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष सिंघई पवन जैन ने बताया शनिवार को श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा के बाद घटयात्रा निकाली गई। इसमें ढोल बाजे, घोड़े बग्गिया, हाथी पर सवार सौधर्म इंद्र राकेश जैन विनीता मुजफ्फरपुर, अभिषेक जैन रचना बेंगलुरु, संपत जैन नीलू जैन व अमित मोनिका जैन चल रहे थे। इंद्राणी पीली केसरिया साड़ी पहनकर सिर पर कलश रखकर पंचकल्याणक स्थल की परिक्रमा करके घटयात्रा ध्वजारोहण स्थल पर पहुंची। यहां पर विधि विधान के साथ सभी धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुई।