
बीना. स्वामित्व योजना के तहत वर्ष 2020 में गांवों में आबादी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराकर भू-स्वामियों के खसरा में नाम दर्ज कर उन्हें स्वामित्व दिया गया था। इसके बाद अब फिर से उसी आबादी भूमि में पटवारी को निष्पादक बनाकर रजिस्ट्री कराई जानी है, जिसका पटवारी संघ द्वारा विरोध किया जा रहा है। बीना ब्लॉक में करीब 22 हजार रजिस्ट्री होना है।
जानकारी के अनुसार जिस भूमि का पटवारी को निष्पादक बनाकर रजिस्ट्री कराई जा रही है वह भूमि अब सरकारी नहीं रही। यदि सरकारी होती तो सरकार जिसे चाहे उसे नियमानुसार आदेश एवं अधिकृत कर रजिस्ट्री करने का अधिकार दे सकती है, यह भूमि अब राजस्व रिकॉर्ड में निजी स्वामित्व में 2024-25 से खसरे में दर्ज हो गई है और उसमें भूमि स्वामी मप्र शासन नहीं है। जब पटवारी भूमि स्वामी नहीं है, तो विक्रय पत्र निष्पादन कैसे कर सकता है। साथ ही आदेशानुसार रजिस्ट्री में पटवारी का व्यक्ति नाम, पद, पहचान संबंधी विवरण एवं ई-हस्ताक्षर निष्पादक के रूप में होना है। यदि भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान, हिस्सेदारी, कब्जा, पहचान अथवा कोई त्रुटी के कारण विवाद उत्पन्न होने से पटवारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराए जाने की आशंका बनी रहेगी। साथ ही पटवारियों पर फार्मर आईडी, जियो टैग गिरदावरी आदि जिम्मेदारी है, जिससे निष्पादक बनाए जाने पर दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा।
पटवारियों का कहना है कि वर्तमान में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फसल गिरदावरी, राजस्व वसूली, भूमि संबंधी जांच, न्यायालयीन प्रकरणों में प्रतिवेदन सहित कई कार्यों की जिम्मेदारी उनके पास रहती है। इसके अलावा शासन की विभिन्न योजनाओं के लिए भी मैदानी स्तर पर जानकारी जुटाने और सत्यापन का काम कराया जाता है। ऐसे में स्वामित्व योजना के निष्पादन की जिम्मेदारी भी जोड़ने गलत है।
पटवारी संघ कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं, जिसमें स्वामित्व अधिकारी अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026 योजना से संबंधित समस्त कार्यों से पटवारी को पूर्णत: पृथक रखे जाने की मांग की है। गौरतलब है कि यह कार्य 17 सितंबर से शुरू होना है, जो पटवारियों के विरोध के चलते शुरू नहीं हो पाएगा।
स्वामित्व योजना के तहत 17 सितंबर से रजिस्ट्री शुरू होना है, जिसका निष्पादन पटवारी कराना है और इसका वह विरोध कर रहे हैं। ब्लॉक में करीब 22 हजार रजिस्ट्री होना है।
डॉ. अंबर पंथी, तहसीलदार, बीना