
सागर. वर्षों से शासकीय योजनाओं से अछूते कोरेगांव के लोगों के अपने स्वयं के आशियाने के अरमान भी कोरे रह सकते हैं। यहां के रहवासी एक बार फिर नियमों की उलझन में उलझते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं नगर पालिका मकरोनिया के वार्ड नबंर ११ के अतंर्गत आने वाले कोरेगांव की। यहां के रहवासी हमेशा से ही शासन-प्रशासन की योजनाओं का लाभ लेने में पिछड़े रहे हैं। इस बार नगर पालिका मकरोनिया क्षेत्र में शुरू होने जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी यह अशंका जाहिर की जा रही है कि यहां के लोगों को आवास योजना का लाभ जहां पर वह काबिज हैं, वहां पर नहीं मिल सकेगा। करीब एक-डेढ़ साल पहले गांव के श्मशान घाट को आर्मी ने अपने कब्जे में ले लिया था। इसके अलावा कुछ अन्य गतिविधियों को लेकर गांव के लोगों ने आर्मी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद यह भी सुनने में आया था कि आर्मी के अधिकारियों का कहना था कि यह जमीन उनकी है, वह चाहें तो पूरे गांव को हटवा सकते हैं।
लोगों के पास नहीं दस्तावेज
२०० साल से बसे गांव के लोगों के पास मकान के व जमीन संबंधी दस्तावेज नहीं हैड्ड। यह अकेला क्षेत्र नहीं है, नगर पालिका क्षेत्र के मकरोनिया, रजाखेड़ी, बड़तूमा, सेमराबाग व गंभीरिया गांव भी अंदर आबादी में हैं। यही कारण है कि यहां के लोगों के पास भी जमीन के दस्तावेज नहीं हैं। पीएम आवास योजना के तहत जमीन के दस्तावेज होना जरूरी है। इस समस्या से सुलझने के लिए नगर पालिका एेसे सभी हितग्राहियों को शासन के माध्यम से भू-अधिकार पत्र जारी कराने में लगा है, लेकिन यह माना जा रहा है कि कोरेगांव में शासन द्वारा भू-अधिकार पत्र जारी नहीं किए जाएंगे। हालांकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।
कोरेगांव में करीब २०० साल से लोग निवास कर रहे हैं। यहां की आबादी पांच हजार के करीब है, जिसमें से हालही में नगर पालिका ने सर्वे कर गांव के करीब ३५० लोगों को आवास योजना के तहत चिन्हित किया है। सूत्रों की मानंे तो यह जमीन भी आर्मी की बताई जा रही है। यदि एेसा हुआ तो राज्य सरकार लोगों को भू-अधिकार पत्र जारी नहीं कर सकेगा। इसमें सेना की जमीन अड़ंगा बन सकती है। क्योंकि यह गांव चारों ओर से सेना की जमीन से घिरा हुआ है।
अन्य जगह करेंगे आवंटन
अभी इस विषय पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। हो सकता है कोरेगांव में भू-अधिकार पत्र जारी न किए जाएं। यदि एेसा होता है तो चिन्हित हितग्राहियों को नगर पालिका क्षेत्र में अन्य जगह शासकीय भूमि आवंटन कराके, वहां पर पट्टे देकर आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।
सुशीला रोहत, नपाध्यक्ष
हम यहीं रहेंगे
यह बात अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आई है। गांव में लोग २०० साल से रह रहे हैं। उन्हें किसी अन्य जगह पट्टे देकर आवास योजना का लाभ दिया जाए, यह नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीण जहां काबिज हैं वहीं पर उन्हें भू-अधिकार पत्र दिए जाएं।
पिंकी वर्मा, कांग्रेस पार्षद