कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में 194 आवेदक अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। जनसुनवाई में एक सबसे चौकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक एनजीओ की संचालक पर स्वयं को कलेक्टर की बहन बताकर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया गया। पथरिया से आई चार छात्राओं ने यह आरोप […]
कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में 194 आवेदक अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। जनसुनवाई में एक सबसे चौकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक एनजीओ की संचालक पर स्वयं को कलेक्टर की बहन बताकर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया गया। पथरिया से आई चार छात्राओं ने यह आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और फीस वापस कराने की मांग की।
छात्रा पूजा काछी, वर्षा आठिया, संतोषी काछी, भूमिका पटेल ने शिकायत में बताया कि सरिता त्रिवेदी नाम की महिला ने डॉक्टर और नर्सिंग कोर्स में एडमिशन देने के नाम पर ठगी की। उन्होंने बताया कि 17 महीने पहले हम लोगों ने तिलकगंज स्थित गीतांजलि और काकागंज स्थित रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया था। यहां न तो किसी प्रकार की ट्रेनिंग दी गई है और न ही कॉलेज में पढ़ाई करवाई जाती है। छात्राओं ने अपनी शिकायत में बताया कि कॉलेज संचालक सरिता त्रिवेदी और निधि राजा हर महीने केवल हम लोगों से फीस के पैसे मांगते हैं, अब तक करीब 21-21 हजार रुपए की राशि गीतांजलि कॉलेज तिलकगंज में जमा कर चुके हैं, जिसकी हम लोगों को कोई रसीद नहीं दी गई। बाद में पता चला कि यह कॉलेज फर्जी है। छात्राओं ने मामले की जांच, मूल दस्तावेज और जमा फीस वापसी की मांग की है। अधिकारियों ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जनसुनवाई के दौरान सरिता त्रिवेदी भी कलेक्टर कार्यालय में मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने मीडिया के सामने कोई भी पक्ष नहीं रखा।
बांदरी थाना क्षेत्र के ललोई गांव में फसल कटाई को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। एक दिन पहले जहां कटाई का काम करने कटनी से आए 37 मजदूर कटाई की मजदूरी न मिलने के कारण किसान पर आरोप लगाने कलेक्टर कार्यालय आए थे। वहीं मंगलवार को किसान भी मजदूरों की शिकायत करने कलेक्ट्रेट पहुंचा। मजदूरों का आरोप था कि 22 लोगों ने 15 दिनों तक 400 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कटाई की थी। जिसका भुगतान नहीं हुआ वहीं किसान का कहना है कि अनाज के बदले कटाई की बात तय हुई थी। कटाई के दौरान ही उन्हें अनाज दे दिया था। इसके बाद मजदूरों ने अन्य किसानों के यहां भी काम किया।