अंगुलियों के जादू से ब्रेल लिपि में बना दी रेलवे समय सारणी

Dec 23, 2015
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सागर.कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो...जी हां...गालिब मियां के शेर की ये पंक्तियां सागर के राकेश चौधरी पर सटीक बैठती हैं। नेत्रहीन राकेश ने आसमान में सुराख करने जैसा ही काम किया है। राकेश ने अपने जैसों के लिए कल्पनाओं के जादू से ब्रेल लिपि में रेलवे समय सारणी, कैलेंडर और दूसरी उपयोगी पाठ्य सामग्री तैयार की है।

अब तक लग नहीं सकी
सागर के बिट्ठल नगर निवासी राकेश ने इंदौर और सागर रेलले स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की समय-सारणी ब्रेल लिपि में बनाई थी, ताकि दूसरे साथियों को ट्रेनों के आने-जाने की जानकारी मिल सके। उसने स्थानीय रेलवे स्टेशन पर इसे लगाने के लिए वहां के रेल अधिकारियों से संपर्क किया, अधिकारियों ने दिलचस्पी दिखाई और राकेश से समय-सारिणी ले भी ली लेकिन अब तक वह पटल पर लग नहीं सकी है।

प्रतिभा का परिचय
वह ब्रेल लिपि सीट के जरिए कागज पर किसी का भी मोबाइल नंबर अंकित कर लेता और अंकों को अंगुलियों से पढ़कर मोबाइल पर अंकित करके बात भी कर लेता है। इतना ही नहीं वह अपने मोबाइल पर आए कॉल के नंबरों की पहचान ब्रेल लिपि के जरिए कर लेता है।

सरकारी ढर्रा हावी
राकेश कहता है कि सरकारी विभागों में नेत्रहीन के पदों के लिए भर्तियां हुईं, जिनमें अधिकतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं, 10वीं निर्धारित की गई थी। वह हायर सेकंडरी परीक्षा पास है, इसके बाद भी कई सरकारी विभागों में उसे नौकरी नहीं मिल सकी। क्योंकि उसके पास सिफारिश नहीं है। वह कहता है कि उसके पास न तो किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि की सिफारिश कराने की हैसियत है और न ही परिवार के लोग इतने सक्षम हैं कि उसके लिए किसी स्वरोजगार से जोड़ सकें।

ताकि असहाय साथी पढ़ सकें
घर से रुपए लेकर व अपनी जेब खर्च से रुपए बचाकर उसने कुछ पाठ्य सामग्री तैयार की है। वह चाहता है कि एेसे नेत्रहीन बच्चे जो असहाय हैं, स्कूल नहीं जा सकते हैं, वह इस पाठ्य सामग्री के जरिए घर पर ही पढ़ाई कर सकते हैं। उन तक इसे पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है, लेकिन कलेक्टर, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों से कई बार सहयोग की गुहार लगाने के बाद भी उसे मदद नहीं मिल रही है। इसी संबंध में कलेक्टर से फिर गुहार लगाने आया था, लेकिन शाम 4.30 बजे तक इंतजार करने के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।

नेत्रहीन राकेश पहले भी मुझसे मिल चुका है। मंगलवार को सुबह रोगी कल्याण समिति की बैठक थी और उसके बाद भी अन्य बैठकें थी। हो सकता है कि वह इस दौरान मेरे ऑफिस आया हो। शासन स्तर पर उसकी जो भी मदद की जा सकती है, नियमानुसार की जाएगी।
एके सिंह, कलेक्टर

Published on:
23 Dec 2015 06:29 am