इस मौके पर भांगड़ा और गिद्दा करके लोहड़ी की खुशियां मनाई जाएगी। वहीं 19 जनवरी को समाज की महिलाएं एक अन्य कार्यक्रम का आयोजन करेंगे
लोहड़ी पंजाब का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। शहर में सिख समाज ने लोहड़ी मनाने की तैयारी शुरू कर दी है। भगवानगंज स्थित गुरुद्वारा में 13 जनवरी की रात में लोहड़ी का पर्व मनाया जाएगा। यहां रात्रि करीब 8 बजे लकड़ियों से लोहड़ी सजाई जाएगी। उसके बाद अग्नि की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। इस मौके पर भांगड़ा और गिद्दा करके लोहड़ी की खुशियां मनाई जाएगी। वहीं 19 जनवरी को समाज की महिलाएं एक अन्य कार्यक्रम का आयोजन करेंगे, जिसमें समाज के सभी लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन गुरुद्वारा की पार्किंग में ही किया जाएगा।
गुरु सिंघ सभा के सतेंदर सिंह से होरा ने बताया कि इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्द-गिर्द नृत्य कर नई फसल की खुशियां मनाते हैं। यह एक तरह से प्रकृति की उपासना और आभार प्रकट करने का पर्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार लोहड़ी पौष मास के अंतिम दिन सूर्यास्त के बाद यानि माघ संक्रांति की पहली रात को मनाई जाती है। इस साल लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन विवाहिता पुत्रियों को मां के घर से वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फल आदि भेजा जाते हैं।
लोहड़ी मनाने के लिए लकड़ियों की ढेरी पर सूखे उपले भी रखे जाते हैं। समूह के साथ लोहड़ी पूजन करने के बाद उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी एवं मूंगफली का भोग लगाया जाता है। गोबर के उपलों की माला बनाकर मन्नत पूरी होने की खुशी में लोहड़ी के समय जलती हुई अग्नि में उन्हें भेंट किया जाता है। इसे 'चर्खा चढ़ाना' कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से सूर्य और अग्नि देव को समर्पित है। लोहड़ी की पवित्र अग्नि में नवीन फसलों को समर्पित करने का भी विधान है। इसके अलावा इस दिन लोहड़ी की अग्नि में तिल, रेवडिय़ां, मूंगफली, गुड़ और गजक आदि भी समर्पित किया जाता है।