यह बात मुनि विमल सागर ने वर्धमान कॉलोनी में धर्म सभा में मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि कर्म को नष्ट और दहन करने के लिए भाव बनाए तो निश्चित रूप से कर्म दहन हो जाएंगे। कर्म दहन का भी व्रत है। सबसे पहले व्रत का पालन करना कर्म प्रगति का नाश करूंगा।
जो दान करता है वह महान बनता है। कंजूस की दशा दयनीय होती है वह अपयश का पात्र होता है, लेकिन थोड़ा सा भी दान प्रारंभ होता है तो यश बढऩे लगता है। दान की महिमा अपरंपार है। यह बात मुनि विमल सागर ने वर्धमान कॉलोनी में धर्म सभा में मंगलवार को कही। उन्होंने कहा कि कर्म को नष्ट और दहन करने के लिए भाव बनाए तो निश्चित रूप से कर्म दहन हो जाएंगे। कर्म दहन का भी व्रत है। सबसे पहले व्रत का पालन करना कर्म प्रगति का नाश करूंगा। ऐसे भाव बनाएं जैसे संस्कार पड़ जाते है उससे सभी प्रकार के कर्म दूर हो जाते हैं
मुनि ने कहा कि मोक्ष की सीट अभी से आप बुक करा सकते हैं। ऐसी विधियां आगम में लिखी हुई है। 156 उपवास संकल्प के साथ पूरे जीवन में कर ले, अतिशयोक्ति नहीं है यह बिल्कुल सही है और यदि आपने पुरुषार्थ किया है तो मुक्ति संभव है। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन जितना अधिकतम हो सके उतना करो। मुनि ने कहा कि जिनेंद्र भगवान को प्रतिदिन एक श्रीफल चढ़ाना चाहिए उसका फल अवश्य मिलता है और प्रतिदिन संयम के साथ समाधि की भावना भाना चाहिए वह भी पूर्ण होगी।
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि मुनि संघ का दोपहर बाद विहार मोराजी की ओर हुआ। शाम को मुनि संघ चौधरन बाई जैन मंदिर बड़ा बाजार पहुंचे। 10 सितंबर को चौधरन बाई मंदिर में मुनि के सानिध्य में अभिषेक, शांतिधारा होगी और मंगल प्रवचन के बाद आहारचर्या संपन्न होगी। 11 सितंबर को मुनि संघ के सानिध्य में पंडित गणेश प्रसाद वर्णी की 152 वी जयंती मोराजी में मनाई जाएगी।