
प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए। फोटो-पत्रिका
बीना. भानगढ़ सर्किल के ग्राम जगदीशपुरा स्थित जमीन की खरीदी के मामले में जगप्रीत सिंह भोगल और अभिनव भोगल ने पे्रसवार्ता कर न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री करने का आरोप लगाया है। साथ ही नायब तहसीलदार पर आरोप हैं कि उन्होंने अवैध सीमांकन की पुष्टी कर बिना सुनवाई के कब्जा हटाने का आदेश कर दिया है।
प्रेसवार्ता में अधिवक्ता हरीश गोलंदाज ने बताया कि उनके पक्षकार जगदीशपुरा में जगप्रीत सिंह और अभिनव सिंह करीब 70 वर्षों से कृषि कार्य करते आ रहे हैं। उनकी बुआ के बेटा सतपाल सिंह और सुखदीप सिंह को लालच देकर जितेन्द्र सिंह राजपूत ने खसरा नंबर 72, 73 और बलराम कुर्मी ने खसरा नंबर 64, 69, 70/1, 71 की करीब 21 एकड़ जमीन खरीद ली। इन जमीनों के प्रकरण न्यायालयों में विचाराधीन हैं। जमीन बेचते समय पक्षकारों को जानकारी भी नहीं दी गई थी। इसके बाद दोनों खरीदारों ने नायब तहसीलदार हेमराज मेहर के यहां सीमांकन कराने के लिए आवेदन दिया गया था, जिसपर हल्का पटवारी कावेरी कुर्मी ने सीमांकन की कार्रवाई नहीं की थी और फिर भी नायब तहसीलदार ने इसकी अवैध पुष्टि कर दी। इसके बाद वर्तमान नायब तहसीलदार रतिराम अहिवार ने बिना अवसर दिए और अधिवक्ता के तर्कों को सुने बिना ही नियत पेशी 14 मई के पहले 11 मई को बेदखली का आदेश कर दिया गया। आदेश तीन माह में ही सुना दिया गया।
अपील को भी कर दिया खारिज
अधिवक्ता ने बताया कि 13 फरवरी 26 को कब्जा हटाने का आवेदन दोनों खरीदारों ने नायब तहसीलदार को दिया था और इसमें उन्होंने सक्रियता दिखाते हुए तीन माह में करीब 14 पेशी कर आदेश दे दिया। जबकि अधिवक्ता ने 11 मई को उनके पक्षकार के स्वास्थ्य खराब होने की जानकारी दी थी और 14 मई की पेशी दी थी, लेकिन 11 मई को ही आदेश कर दिया और जिसमें उल्लेख किया है कि अधिवक्ता ने स्वयं ही 14 मई की पेशी लिखी थी, जो मान्य नहीं है। आदेश के खिलाफ अपील प्रस्तुत करने पर उसे भी खारिज कर दिया गया।
पैतृक है जमीन
जगप्रीत सिंह ने बताया कि 1930 में दादी ने जमीन ली थी और फिर पिता ने कृषि कार्य किया। अन्य भाई, बहन बाहर थे, जिससे उनके पास पावर ऑफ अटर्नी भी है। एक फैक्ट्री में उनका शेयर था और वह शेयर बुआ के बेटों को दे दिए हैं और जमीन उन्होंने ले ली थी। इसके बाद भी बिना बताए जमीन बेच दी है। इस मामले को लेकर न्यायालयों में अपील की है। राजनीतिक लोग यह सब करा रहे हैं और मनमाने दामें पर जमीन खरीदी जा रही हैं।
आरोप गलत हैं
जमीन का नामांतरण, सीमांकन होने के बाद कब्जा हटाने का आदेश दिया है। सामने वाले पक्ष को सुनवाई के मौके दिए गए थे और 14 मई की पेशी उन्होंने नहीं दी थी वह अधिवक्ता ने लिखी है, जो आदेश हुआ है वह नियमानुसार है। किसी दबाव में कार्रवाई नहीं की है। पूर्व में एसडीएम के स्थगन आदेश पर कार्रवाई रोकी भी गई थी।
रतिराम अहिरवार, नायब तहसीलदार, बीना
Published on:
25 May 2026 11:52 am
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