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सड़क हादसों में इलाज न मिलने से तोड़ रहे दम, शहर में नहीं आपात चिकित्सा सुविधाएं

गंभीर घायलों के लिए हर मिनट पड़ता है भारी, रेफर करने पर रास्ते में तोड़ देते है दम, बड़े उद्योग होने के बाद भी नहीं है ट्रामा सेंटर

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People dying due to lack of treatment in road accidents, there are no emergency medical facilities in the city.

सिविल अस्पताल। फाइल फोटो

बीना. औद्योगिक और यातायात की दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहे बीना क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन गंभीर घायलों के उपचार के लिए अब तक पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। हालात यह हैं कि दुर्घटना में घायल लोगों को सिविल अस्पताल लाने के बाद प्राथमिक उपचार देकर मेडिकल कॉलेज सागर या जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से कई बार घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
शहर और आसपास के क्षेत्र से होकर नेशनल हाइवे, रिफाइनरी रोड सहित अन्य रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही चौबीसों घंटें निकलते हैं। प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन होने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। इसके बावजूद शहर में ट्रॉमा सेंटर, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, न्यूरो उपचार और गंभीर घायलों के लिए आपात चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। लोगों का कहना है कि सड़क हादसों में सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब घायल के सिर, रीढ़ या हाथ-पैर में गंभीर चोट आती है, तब सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार तो मिल जाता है, लेकिन एक्सपर्ट डॉक्टर, ऑपरेशन थियेटर और आवश्यक उपकरणों की कमी के कारण मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। कई बार एंबुलेंस की उपलब्धता और समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीज की हालत और बिगड़ जाती है।

उद्योग लगने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
क्षेत्र में स्थित रिफाइनरी और जेपी थर्मल पावर प्लांट जैसे उद्योगों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आपातकालीन चिकित्सा की व्यवस्था नहीं है। यदि रिफाइनरी, जेपी में भी कोई गंभीर घायल होता है, तो इन उद्योगों की अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं न होने से घायल को अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

रेलवे अस्पताल का भी नहीं मिल रहा लाभ
रेलवे का भी बड़ा अस्पताल बीना में है, लेकिन सुविधाएं वहां भी नहीं हैं। साथ ही रेलवे कर्मचारियों और उनके परिजनों का ही इलाज होता है। यदि ट्रेन से गिरकर कोई घायल होता है, तो उसे सिविल अस्पताल ही भेजा जाता है।

ट्रामा सेंटर बनाना जरूरी
शहर में बड़े उद्योग हैं, इनमें ट्रामा सेंटर बनाने की जरूरत है, क्योंकि हजारों कर्मचारी काम कर रहे हैं। यदि ट्रामा सेंटर बन जाए, तो सडक़ दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को तो इलाज मिलेगा ही। साथ ही उद्योगों में यदि कोई घटना होती है, तो घायलों को तत्काल इलाज मिलेगा। सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ और संसाधनों की कमी है, जिससे गंभीर हालत में रेफर करना पड़ता है।
डॉ. संजीव अग्रवाल, बीएमओ