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शहर में 350 से अधिक घरों में सोलर सिस्टम का सपोर्ट, रात में बढ़ रहा ट्रांसफॉर्मरों और केबलों पर लोड

सोलर सिस्टम से घटे बिल, लेकिन बढ़ा बिजली नेटवर्क पर दबाव, बिजली कंपनी ने अभी तक उपकरण नहीं किए हैं अपडेट

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Over 350 homes in the city have solar systems, increasing the load on transformers and cables at night.

सबस्टेशन में लगा 8 एमवीए का ट्रांसफॉर्मर। फोटो-पत्रिका

बीना. बिजली बिल में राहत पाने के लिए शहर में तेजी से लोग घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। वर्तमान में शहर में करीब 350 घरों और प्रतिष्ठानों पर ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। सोलर सिस्टम लगने से दिन के समय घरों की बिजली जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं, लेकिन रात के समय पूरा भार फिर से बिजली कंपनी के नेटवर्क पर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार शहर में अधिकांश उपभोक्ता 3 किलोवॉट से 5 किलोवॉट क्षमता तक के ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। सोलर सिस्टम लगने के बाद लोगों की बिजली उपयोग करने की आदत भी बढ़ी है। पहले जहां अधिक बिल आने के डर से लोग सीमित बिजली उपकरणों का उपयोग करते थे, वहीं अब एक से अधिक एसी, इंडक्शन चूल्हे और अन्य हाई पावर उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है। दिन में इन उपकरणों का भार सोलर सिस्टम संभाल लेता है, लेकिन रात के समय यही पूरा लोड बिजली कंपनी की लाइन और ट्रांसफॉर्मरों पर आ जाता है, इससे ट्रांसफॉर्मर, केबल और अन्य उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। जिससे बार-बार फाल्ट और बिजली बाधित होने की समस्या सामने आने लगी है।

रात के समय बढ़ जाता है पचास एम्पियर लोड
शहर के वीरसावरकर वार्ड स्थित सबस्टेशन में 8 एमवीए का ट्रांसफॉर्मर लगा है, जिससे 11 केवी इटावा और मुंगावली फीडर संचालित होते हैं। यह सबसे बड़ा फीडर है। इसकी कुल क्षमता 410 एम्पियर है, दिन में इसका लोड 340 एम्पियर रहता है, जो रात के समय 395 तक पहुंच जाता है। रात में लोड बढऩे का कारण सोलर सिस्टम के साथ-साथ रात के समय लोग घरों में रहते हैं, जिससे एसी, कूलर और पंखों का उपयोग ज्यादा होता है।

ऑन-ग्रिड और ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम में अंतर
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम बिजली कंपनी के ग्रिड से जुड़ा रहता है, जिसमें बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती है। दिन में सोलर और रात में ग्रिड से सप्लाई चालू हो जाती है, इसकी लागत कम रहती है। ऑफ-ग्रिड सिस्टम में बिजली कंपनी के ग्रिड पर निर्भर नहीं होना पड़ता है, बैटरी के माध्यम से बिजली स्टोर होती है, बिजली कटने पर भी सप्लाई जारी रहती है, लेकिन लागत अधिक और मेंटेनेंस ज्यादा रहता है।

ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाने भेजा है प्रस्ताव
जेई आकाशदीप ने बताया कि बिजली का लोड बढ़ रहा है और 8 एमवीए की जगह 10 एमवीए का ट्रांसफॉर्मर लगाने का प्रस्ताव भेजा है। साथ ही इस ट्रांसफॉर्मर से इटावा फीडर भी जल्द हट जाएगा, जिससे लोड कम होगा।