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साध्वी श्रुतमति का देवलोकगमन, एमपी में पसरा शोक, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

Aryika Shrutamati Mataji- आर्यिका श्रुतमति माता उच्च शिक्षित थीं और मूलत: सागर की निवासी थीं, दो माह के प्रवास पर गई थीं रीवा

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सागर

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deepak deewan

May 20, 2026

Aryika Shrutamati Mataji Attains Samadhi in Rewa

Aryika Shrutamati Mataji Attains Samadhi in Rewa

Aryika Shrutamati Mataji - एमपी में एक दर्दनाक हादसे में साध्वी श्रुतमति का देवलोकगमन हो गया। वे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित थीं। आर्यिका श्रुतमति माताजी की आज सुबह रीवा के पास वाहन दुर्घटना में समाधि हो गई। उनके साथ उपसममति माताजी भी थी जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। दो अन्य माताजी वाहन की चपेट में आने से बच गई। 48 वर्ष की माताजी श्रुतमति व साध्वी उपसममति को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मारी थी। आर्यिका श्रुतमति माताजी की समाधि की सूचना पर जैन समुदाय में शोक पसर गया है। उनके अंतिम दर्शन के लिए लोग उमड़ रहे हैं। आर्यिका श्रुतमति माता उच्च शिक्षित थीं लेकिन जल्द ही उनमें वैराग्य की भावना आ गई। उन्होंने आचार्यश्री विद्यासागरजी से दीक्षा ली थी। वे मूलत: सागर की निवासी थीं।

सिविल लाइन थाने के कलेक्ट्रेट के समीप हुआ हादसा, आर्यिका श्रुतमति माता का पार्थिव शरीर कटरा जैन मंदिर में रखा

श्रुतमति माताजी के साथ शौच क्रिया के लिए जाते समय तड़के यह हादसा हुआ। वे दो माह के प्रवास के लिए करीब एक माह पूर्व रीवा आई थीं। हादसे की सूचना मिलते ही एसपी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। आर्यिका श्रुतमति माता का पार्थिव शरीर कटरा जैन मंदिर में रखा गया है।

आर्यिका श्रुतमति उच्च शिक्षित थीं, एमएससी मानव शास्त्र और संस्कृत से एमए किया

आर्यिका श्रुतमति माताजी मूलत: सागर की थीं। वे नगर के रामपुरा वार्ड की निवासी थीं। आर्यिका श्रुतमति माताजी आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित थीं। वर्तमान में भी आर्यिका सौम्यमती माताजी के संघ में विराजमान थीं। 15 जुलाई 1978 को जन्मी आर्यिका श्रुतमति उच्च शिक्षित थीं। उन्होंने एमएससी मानव शास्त्र और संस्कृत से एमए किया था।

भाग्योदय तीर्थ सागर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था

आर्यिका श्रुत माताजी की आर्यिका दीक्षा 13 फरवरी 2006 को सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के कर कमलों से हुई थी। 29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ सागर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था।

माताजी के बड़े भाई आचार्य संघ में मुनि श्री अचलसागर महाराज वर्तमान में तारादेही जिला दमोह में विराजमान

सागर के मुकेश जैन ढाना ने बताया कि माताजी के ग्रहस्थ अवस्था के बड़े भाई आचार्य संघ में मुनि श्री अचलसागर महाराज हैं और वर्तमान में तारादेही जिला दमोह में विराजमान है। रीवा नगर में हुई दुर्घटना की पुष्टि माताजी के ग्रहस्थ अवस्था के भाई आलोक जैन श्रीजी ने भी की है।