नो-डवलपेंट जोन को लेकर लोगों ने सौंपा ज्ञापन, कहा रिफाइनरी प्रबंधन की दोहरी नीति से परेशान हैं किसान और आसपास के ग्रामीण
बीना. रिफाइनरी के चारों तरफ नो-डवलपमेंट जोन घोषित किया गया है, जिसमें ग्रामीणों और किसानों को निर्माण नहीं करने दिया जाता है। जबकि दीवार से लगकर कपंनियों ने प्लांट लगा लिए हैं। इस संबंध में लोगों ने मंत्री गोविंद सिंह को ज्ञापन सौंपकर नो-डवलमेंट जोन खत्म कराने की मांग की है।
लोगों की मांग पर मंत्री ने कहा कि कई दिनों से यह शिकायत मिल रही है कि नो-डवलपमेंट जोन क्षेत्र में किसान, ग्रामीणों को स्थायी व अस्थायी निर्माण करने पर मना है। वहीं, दूसरी ओर कंपनियों ने रिफाइनरी की बाउंड्रीवॉल के बाजू से प्लांट लगा लिए हैं, जो विसंगति है। नियम सभी पर एक जैसा लागू होना चाहिए। इस संबंध में कलेक्टर सहित दिल्ली के अधिकारियों से चर्चा करेंगे और समस्या का समाधान कराया जाएगा। क्योंकि बाजू में लगे प्लांट से यदि कोई घटना होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा। ज्ञापन सौंपने वालों में सौरभ आचवल, लोकेन्द्र सिंह, जियहिन्द, ग्याप्रसाद, रिंकू ठाकुर, रवि, रतिराम, शुभम कुशवाहा, मनोज, राहुल, राकेश, हरकिशन आदि उपस्थित थे।
यह है नो-डवलपमेंट जोन में नियम
31 मार्च 2009 में तत्कालीन कलेक्टर ने रिफाइनरी के चारों तरफ पांच किलोमीटर में नो-डेवलपमेंट जोन घोषित किया था, जिसमें निर्माण और विकास संबंधी गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। ग्रामीणों को निर्माण के लिए क्षेत्रीय विकास नियंत्रण समिति की अनुमति लेनी पड़ती है और जो कठिन कार्य है। इसके बाद भी कंपनियों ने एक किमी के अंदर निषिद्ध क्षेत्र में प्लांट लगाए हैं और बेस कैंप बनाए जा रहे हैं। इसे निरस्त कराने की मांग लगातार की जा रही और ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट 1923 के अंतर्गत निषिद्ध क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों की जांच कर कार्रवाई की जाए।
कई बार सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन
नो-डवलपमेंट जोन को लेकर पिछले कई महीनों से जनप्रतिनिधि अधिकारियों को ज्ञापन दिए जा रहे हैं, जिसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि बिना अनुमति के ही प्लांट बनाए गए हैं और सभी कपंनियों को तहसीलदार ने नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन उसके बाद कार्रवाई नहीं की गई है। साथ रिफाइनरी प्रबंधन भी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं चाहता है। जबकि किसानों के निर्माण करने पर रिफाइनरी के सुरक्षा गार्ड ही कार्य रुकवाने के लिए पहुंचते हैं।