
बीना. बीना सहित आसपास के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बोवनी की गई है, लेकिन सोयाबीन में अफलन की स्थिति बनने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। जबकि अच्छे उत्पादन के लिए किसानों ने हजारों रुपए की दवाओं का छिडक़ाव भी किया है।
इस वर्ष सोयाबीन की फसल को अनुकूल मौसम मिलने से कुछ किस्मों की फसल चार से पांच फीट तक बढ़ गई है, लेकिन उसमें फूल और फलियां नहीं आई हैं। जबकि फसल पर किसान लाखों रुपए की लागत लगा चुके हैं। फसल में अफलन होने से किसान चिंतित, क्योंकि उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। मालथौन तहसील के ग्राम मढैया माफी निवासी किसान रामनारायण चाचौदीया ने बताया कि उनकी सोयाबीन की फसल चार से पांच फीट तक लंबी हो गई है और खेत में बिछने लगी है। फसल में फूल व फलियां नहीं आ रही है, जिससे उत्पादन शून्य होगा। अच्छे उत्पादन के लिए दवाओं का छिडक़ाव भी किया है, लेकिन फिर भी कोई असर नहीं हुआ है। इसी तरह की स्थिति बीना क्षेत्र में भी बनी है। फसल में फलियां बहुत कम आई हैं, जिससे लागत भी नहीं निकलेगी।
फसलों में अफलन की स्थिति बनने पर अब किसानों को फसल बीमा से उम्मीद है। किसान जल्द से जल्द फसलों का सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं, जिससे समय पर रिपोर्ट तैयार हो सके। पिछले वर्ष भी किसानों की फसल खराब हुई थी, लेकिन अभी तक बीमा राशि नहीं आई है। जबकि किसान हर वर्ष प्रीमियम राशि जमा करते हैं। करोडों रुपए की राशि जमा होने के बाद भी लाभ नहीं मिल रहा है। यदि समय पर राशि मिले, तो किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
कृषि वैज्ञानिक आशीष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि किसान एक एकड़ में चालीस किलो तक सोयाबीन बीज की बोवनी कर देते हैं, जबकि तीस किलो बोवनी करना चाहिए। घनी बोवनी से भी फसल की लंबाई बढ़ जाती है। साथ ही इस वर्ष मौसम भी फसल के अनुकूल होने से यह स्थिति बनी है। कुछ दिन किसान फूल, फलियां आ सकती हैं। अफलन होने पर फसल का ग्रीन खाद बनाया जा सकता है।