केन्द्रों पर भीड़ कम करने की गई है व्यवस्था शुरू, जो किसानों के लिए बन रही मुसीबत, पर्याप्त खाद न मिलने से बोवनी कार्य होगा प्रभावित
बीना. पिछले वर्षों में खाद वितरण केन्द्रों पर किसानों की भीड़ होने से विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। इसके बाद ई-टोकन की व्यवस्था शुरू की गई है और इसके आधार पर ही किसानों को खाद मिलेगा। टोकन बुक करने के लिए फॉर्मर आईडी का होना जरूरी है और उसमें दर्ज रकबा के अनुसार खाद मिलेगा, लेकिन अभी बड़ी संख्या में किसानों के पूरे खसरा दर्ज नहीं हो पाए हैं।
जानकारी के अनुसार फॉर्मर आईडी में 30 प्रतिशत खसरा नंबर दर्ज नहीं हुए हैं, जिससे इन किसानों को खाद नहीं मिल पाएगा। ऐसे किसानों को पहले आईडी में खसरा नंबर दर्ज कराना होगा और फिर ई-टोकन जारी होगा। किसान सीताराम ने बताया कि उनका ढाई हेक्टेयर रकबा है, लेकिन फॉर्मर आईडी में नौ डिसमिल जमीन का खसरा दर्ज है, जिससे सिर्फ एक बोरी खाद मिल पाएगा। जबकि जरूरत उनको ज्यादा खाद की है। किसान सुयश सिंह ने बताया कि फॉर्मर आईडी में पूरे खसरे नहीं जुड़ पाए हैं, जिससे खाद कम मिलेगा। ऐसे ही कई किसान हैं, जो इस समस्या से जूझ रहे हैं।
तकनीकी रूप से कमजोर किसान परेशान
ई-टोकन व्यवस्था से वह किसान परेशान हैं, जो एंड्राइड मोबाइल चलाकर नहीं जानते हैं और तकनीकी रूप से कमजोर है, उन्हें ई-टोकन बुक करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे किसानों की समस्या भी हल करने कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
जिस फसल की बोवनी, उसके अनुसार ही मिलेगा खाद
ई-टोकन व्यवस्था के पहले किसान खरीफ सीजन में भी डीएपी खाद खरीद लेते थे, जिससे रबी सीजन में परेशानी न हो, लेकिन अब फसल के अनुसार ही गोदाम और दुकानों से खाद मिलेगा। खरीफ फसल में सोयाबीन की बोवनी पर ई-टोकन में एसएसपी, एनपीके ही खाद मिलेगा। मक्का फसल के लिए डीएपी खाद मिलेगा।
नहीं है डीएपी खाद
अभी गोदाम और बाजार में दुकानों पर डीएपी खाद नहीं है। अभी एसएसपी, एनपीके सहित अन्य खाद उपलब्ध हैं। किसानों का कहना है कि हर वर्ष वह रबी सीजन के लिए डीएपी खाद रख लेते थे, लेकिन इस वर्ष खाद नहीं मिल पा रहा है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने बताया कि ई-टोकन व्यवस्था किसानों की सुविधा के लिए शुरू की गई है, जिससे उन्हें आसानी से खाद मिल सके। साथ ही इसमें जो भी परेशानी आ रही हैं, उनका समाधान किया जा रहा है।
जोड़े जा रहे हैं खसरा
फॉर्मर आईडी में छूटे हुए खसरा नंबर जोडऩे का कार्य चल रहा है। ई-टोकन बुक करने वाले एप से किसान स्वयं छूटे हुए खसरा जोड़ सकते हैं, जिसका वेरिफिकेशन कर दिया जाता है।
डॉ. अंबर पंथी, तहसीलदार, बीना