पद्माकर सभागार में शनिवार को हमारे राम के पहले शो का इंतजार दर्शकों को रोमांचित कर गया। नाट्य प्रस्तुति रामायण की उस कथा पर आधारित थी, जो लव और कुश पूछे गए प्रश्नों से शुरू होती है और जो भगवान राम व माता सीता की यात्रा, त्याग, प्रेम और संघर्ष को एक नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। नाटक में रावण का बहन सूर्पणखा का किरदार भी बेहतर प्रस्तुत हुआ। आखिरी पल में रावण अपने दरबार में निद्रा की मुद्रा में होते हैं। इस बीच उनके सपने में राम आते हैं और दोनों के बीच संवाद होता है। रावण कहते हैं- तुम मर्यादा पुरुषोत्तम थे, युद्ध के बजाय शांति मार्ग अपनाते ? इस पर राम जवाब देते हैं- मैंने कभी हनुमान, कभी अंगद, कभी जामवंत तो कभी कुंभकरण के जरिए तुम्हें समझाया था, ताकि विनाश से बचा जा सके। इस संवाद से संदेश दिया गया कि सही मार्ग पर चलें। गलती करने पर हमेशा किसी न किसी माध्यम से ये जरूर पता चलता है कि आप गलत मार्ग पर हैं, फिर भी हम उन पर ध्यान नहीं देते।