फसल बर्बाद होने से सदमें में आया दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के सेमर कछार का किसान, एक सप्ताह में तीन किसानों ने तोड़ा दम
सागर. फसलों की बर्बादी से घबराए किसान सदमे में हैं। अंचल में एक सप्ताह में फसल खराब होने से सदमे में आए दो किसानों की मौत हो चुकी है। वहीं एक किसान द्वारा कीटनाशक पीकर आत्महत की गई है। सोमवार को दमोह जिले के बटियागढ़ थाने के सेमर कछार में फिर एक किसान गले में फंदा लगाकर झूल गया। गनीमत यह रही कि उसी दौरान पत्नी पहुंची और उसने तत्काल फंदाकाटकर जान बचा ली। किसान सोयाबीन-उड़द की फसल चौपट होने और पुराना कर्ज न चुका पाने से परेशान था।
जानकारी के अनुसार बटियागढ़ दमोह क्षेत्र में सेमर कछार निवासी पुरषोत्तम यादव 35 ने सोमवार सुबह करीब 7.३० बजे घर में रस्सी से लटककर जान देने की कोशिश की। आंगन में काम कर रही उसकी पत्नी गेंदारानी ने जब कमरे में पत्नी की चीख और सामान गिरने की आवाज सुनी तो वह अंदर दौड़ी। कमरे में पति को फंदे पर झूलता देख घबरा गई। उसने तुरंत कमरे में रखे हंसिए से फंदा कटा दिया। जिससे पुरषोत्तम जमीन पर आ गिरा। उसे बेसुध हालत में परिजन मेडिकल कॉलेज जहां उसे भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
पुरुषोत्तम के भाई लखन यादव ने बताया कि वे तीन भाई हैं और सभी साथ खेती करते हैं, उनके पास 10 एकड़ जमीन है। तीन साल से लगातार फसल खराब होने से आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी। इस बार तीनों के हिस्से की जमीन पर सोयाबीन व उड़द की बोवनी की थी। इस बार भी मौसम की बेरुखी के चलते फसल बिगड़ गई थी, इसी से वह परेशान था।
पुरषोत्तम की पत्नी गेंदारानी के अनुसार इस बार फसल अच्छी थी। पुरषोत्तम को इस बार हालत सुधरने और करीब डेढ़ लाख का पुराना कर्ज चुकने की उम्मीद थी। पहले अल्पवृष्टि ने उसकी उम्मीद को फीका कर दिया। जब बची खुची फसल की थ्रेसिंग करने की तैयारी कर रहा था, बारिश ने उसे खराब कर दिया। खेत में भीगी फसल अंकुरित होने से पुरषोत्तम को कोई रास्ता नहीं सूझा और वह फंदे पर झूल गया।