वाहनों में तेज रोशनी वाली एलईडी हेड लाइट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एलईडी की रोशनी मोबाइल से भी ज्यादा खतरनाक है। वाहनों में बेहतर रोशनी और आकर्षक लुक के कारण लोग इन्हें लगवा रहे हैं, लेकिन यह लाइट आंखों के लिए हानिकारक हो सकती है।लाइट की तीव्र, सीधी और नीली-श्वेत रोशनी सामने […]
वाहनों में तेज रोशनी वाली एलईडी हेड लाइट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एलईडी की रोशनी मोबाइल से भी ज्यादा खतरनाक है। वाहनों में बेहतर रोशनी और आकर्षक लुक के कारण लोग इन्हें लगवा रहे हैं, लेकिन यह लाइट आंखों के लिए हानिकारक हो सकती है।
लाइट की तीव्र, सीधी और नीली-श्वेत रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालकों की आंखों में तेज चकाचौंध पैदा करती है। इससे कुछ क्षणों के लिए दिखाई देना कम हो जाता है, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है। तेज लाइट से आंखों का डार्क एडॉप्टेशन (अंधेरे में ढलने की क्षमता) प्रभावित होता है। सामने से तेज रोशनी पडऩे के बाद कुछ समय तक सडक़ साफ दिखाई नहीं देती। तेज एलईडी लाइट लगाकर वाहन चलाने वाले ड्राइवरों की आंखें जल्दी खराब हो रही हैं।
वाहन चालकों की आंखें जल्दी खराब हो रहे हैं। इनमें कई तरह की समस्याएं बढ़ी हैं। आंखों की जल्दी थकान शामिल है। अत्यधिक तेज एलईडी लाइट के कारण चालक की आंखों को लगातार अधिक रोशनी के अनुसार ढालना पड़ता है, जिससे आंखें जल्दी थक जाती हैं। तेज रोशनी से कॉन्ट्रास्ट कम होता है, जिससे सडक़ पर गड्डे, पैदल यात्री या हल्के रंग की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखती है। इसके अतिरिक्त, सडक़ के संकेत बोर्ड, सामने वाले वाहन या गीली सडक़ से परावर्तित रोशनी आंखों में चकाचौंध पैदा करती है, जिससे कुछ क्षणों के लिए दृष्टि बाधित होती है।
लंबे समय तक तेज और नीली रोशनी के संपर्क में रहने से सिरदर्द, भारीपन और कुछ लोगों में चक्कर आने की शिकायत हो सकती है। अत्यधिक रोशनी के कारण आंखें अंधेरे के लिए कम संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे तेज लाइट बंद करने के बाद भी कुछ समय तक स्पष्ट दिखाई नहीं देता। विशेष रूप से बुजुर्ग और चश्मा पहनने वाले लोगों को मोतियाबिंद, ड्राई आई या रिफ्रैक्टिव एरर जैसी समस्याओं के कारण एलईडी लाइट से ग्लेयर की समस्या और अधिक बढ़ जाती है।
इन बातों को ध्यान में रखकर अपनी और दूसरों की आंखों को नुकसान से बचा सकते हैं
वाहन में हेडलाइट की सही बीम सेटिंग और एलाइन्मेंट करवाएं
हाई बीम का उपयोग केवल अंधेरी हाईवे सडक़ों पर करें