सागर

रिफाइनरी के बाजू से प्लांट बनाने नो-डेवलपमेंट जोन का नियम नहीं, ग्रामीणों को रोका जा रहा कार्य करने से

नो-डेवलपमेंट जोन खत्म नहीं हुआ, तो होगा उग्र आंदोलन, सौंपा ज्ञापन

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Jan 10, 2026
तहसील में प्रदर्शन करते हुए

बीना. बीपीसीएल बीना रिफाइनरी के पास पांच किमी का नो-डेवलपमेंट जोन घोषित किया गया है, जिससे आसपास के ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों को निर्माण कार्य नहीं करने दिया जा रहा है और रिफाइनरी के बाजू में रिफाइनरी विस्तार के लिए अस्थायी प्लांट लगाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। इसके विरोध में शुक्रवार को सभी दलों के कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों ने पीएम, सीएम के नाम तहसीलदार अंबर पंथी को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2009 में कलेक्टर ने रिफाइनरी के आसपास पांच किलोमीटर में नो-डेवलपमेंट जोन बनाकर निर्माण और विकास संबंधी गतिविधियों को रोक दिया है। इस विवादस्पद आदेश का कोई विधिक आधार नहीं है। तत्कालीन संचालक नगर तथा ग्राम निवेश मप्र शासन केके सिंह ने पत्र क्रमांक 5218/विपो-132, 29 जून 2000 में नो-डेवलपमेंट जोन बनाने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करने का अभिमत दिया था, लेकिन फिर भी कलेक्टर ने आदेश पारित किया। इस आदेश के कारण सैकड़ों ग्रामीण अपने मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। इस जोन में शामिल ग्रामीण घर का छप्पर तक नहीं बना पाते हैं और यदि बनाने का या सुधारने का प्रयास करते हैं, तो रिफाइनरी प्रबंधन के द्वारा उनकी शिकायत दर्ज करा दी जाती है। वहीं, दूसरी ओर रिफाइनरी विस्तार के नाम पर इस क्षेत्र में कई उद्योग और प्लांट लगवाए जा रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश है। नो-डेवलपमेंट जोन वाले क्षेत्र में लगभग 60 गांव की आबादी निवास करती है। यदि इतनी बड़ी आबादी की विकास संबंधी गतिविधियों को रोका गया, तो यह समाज पर दुष्प्रभाव डालेगी। इसलिए इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। यदि एक सप्ताह में आदेश निरस्त नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञापन सौंपने वालों लोकेन्द्र सिंह, इंदर सिंह, सौरभ आचवल, अमरप्रताप सिंह, राजेन्द्र सिंह, विवेक सिंह, राजकमल सोनी, अवधेश तिवारी, प्रतिपाल सिंह, सुयश ठाकुर आदि शामिल हैं।

Published on:
10 Jan 2026 11:52 am
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