आज अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस पर विशेष
सागर. एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी उम्र कभी उनके जीवन के लिए बाधा नहीं बनी। ऐसे लोग उम्र को ठेंगा दिखाकर अपना काम पूरी लगन से कर रहे हैं और सफल भी हैं। आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के मौके पर शहर की ऐसी ही शख्सियतों के बारे में बता रहे हैं, जो ८० की उम्र पार करने के बावजूद एक्टिव हैं और युवाओं के लिए मिसाल भी। युवा इनसे प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं, इस उम्र भी ये लोगों का सहारा बने हुए हैं।
90 की उम्र में कर रही हैं लेखन
डॉ. विद्यावती मालविका, वरिष्ठ साहित्यकार, कवयित्री, सेवानिवृत्त व्याख्याता की कर्मठता, अध्ययनशीलता और नया ज्ञान अर्जित करने की ललक बावजूद उन्हें आज 90 की उम्र में भी क्रियाशील बनाए हुए है। नई किताबें पढऩे में उनकी सदैव रूचि बनी रहती है। अखबार विशेष रूप से पत्रिका समाचार पत्र हर दिन पढ़ती हैं। इस उम्र में भी वे अपने ज्यादातर काम स्वयं करती हैं।
९६ साल में किए बद्रीनाथ के दर्शन, सुबह एक घंटे सैर करने के बाद शुरू होती है दिनर्चा
पोद्दार कॉलोनी निवासी अवध रानी मिश्रा ९६ साल की उम्र में बद्रीनाथ के दर्शन करके दो
साल पहले लौटीं। ९८ की उम्र में भी वे घर के काम में सक्रिय हैं,
साथ ही घर की खेती का हिसाब-किताब भी रखती हैं। उनके मागदर्शन में खेती काम होता है। अवधरानी के बेटा-बहू शिक्षा विभाग में हैं, और घर की मुखिया
के साथ वे पूरी जिम्मेदारी भी निभाती हैं। उन्होंने बताया कि सुबह
से रोजाना १ किमी की सैर के बाद दैनिक चर्या के काम करती हैं
और पूजा पाठ करती हैं। उन्होंने बताया कि घर के काम के बाद अब इस उम्र में भगवान की भक्ति में ज्यादा समय देती हैं। सुबह-सुबह रोजाना घूमने से स्वास्थ्य और मन दोनों स्वस्थ रहता है। इस उम्र में भी उन्हें कोई बीमारी नहीं है।
इनसे शिक्षक ले रहे हिंदी का ज्ञान
88 वर्ष के हरिशंकर नेमा एक्सीलेंस स्कूल सागर से सेवानिवृत्त व्याख्यता हैं। ये हिन्दी विषय के व्याख्याता रहे हैं। इनके छात्र देशभर में हैं। हाल ही में पूर्व छात्र-छात्राओं का मिलन समारोह हुआ तो छात्र इनसे मिलने पहुंचे। नेमा हिन्दी के वरिष्ठ व्याख्याता रहे हैं, जब भी शहर के शिक्षकों को जरूरत होती है वे इनसे अपने कठिन सवालों के जबाव लेने पहुंच जाते हैं। सुबह ४ बजे उठने के बाद उनकी दिनचर्या शुरू होती है।