
Saharanpur MP: सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रविवार को भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें सत्तारूढ़ दल से देशभक्ति के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। एएनआई से बातचीत में मसूद ने छात्र कार्यकर्ताओं के मुकदमों में हो रही देरी पर सवाल उठाए, संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने का आरोप लगाया और कांग्रेस की 1 नवंबर को प्रस्तावित दिल्ली रैली पर भाजपा की आलोचना को खारिज किया।
मसूद का बयान ऐसे समय आया है, जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग वाले पोस्टर और ग्रैफिटी (दीवारों पर लिखे नारे) को लेकर सियासत गरमाई हुई है। साथ ही कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी बयानबाजी तेज है।
कैंपस में हो रहे प्रदर्शनों और नारों पर पूछे गए सवाल पर मसूद ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को तेजी से काम करना चाहिए और आरोपियों को लंबे समय तक बिना सुनवाई जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। पांच साल हो गए और ट्रायल अब तक शुरू नहीं हुआ। इससे पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी दोषी है या नहीं, यह अदालत तय करेगी, लेकिन व्यवस्था को पूरी तरह रोक देने पर लोग सवाल उठाएंगे ही।
छात्र प्रदर्शनों के पास उनकी मौजूदगी को लेकर भाजपा नेताओं के आरोपों पर मसूद ने राष्ट्रविरोधी होने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान उनकी रगों में बसता है और जिन्हें 52 साल तक तिरंगा याद नहीं आया, उन्हें उन्हें सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं है। मसूद ने दावा किया कि उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया के सामने कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और सभी छात्रों ने उनके बयान का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नारे लिखे गए, वे भाजपा के पिट्ठुओं ने लिखे हैं, ताकि आंदोलन को बाधित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आंदोलन टूटेगा नहीं।
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद भी बढ़ गया है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। प्रसाद ने कहा था कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी तारीख है। ऐसे में इस दिन रैली आयोजित करने के फैसले पर कांग्रेस को पुनर्विचार करना चाहिए।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने रविशंकर प्रसाद की उम्र को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रविशंकर प्रसाद उस उम्र में पहुंच गए हैं, जब रिटायरमेंट का समय होता है। उनके बारे में क्या बात करनी है? मसूद ने आगे कहा कि भाजपा को हर समय राहुल गांधी ही सपने में दिखाई देते हैं।