
देवबंद/ सहारनपुर. वाराणसी की मुस्लिम महिला नाजनीन अंसारी की ओर से श्रीराम की आरती करने के बाद उठा विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। अब नाजनीन अंसारी ने एक और बयान देकर नया विवाद खड़ कर दिया है। उन्होंने अब कहा है कि दारुल उलूम देवबंद इस्लाम का हिस्सा ही नहीं है। नाजनीन के इस बयान पर मदरसा दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती शरीफ खान ने कहा कि देवबंद के उलेमा इस्लाम का हिस्सा ही नहीं है, ये बोलने के लिए उनके पास क्या सबूत है ? वो कहती हैं कि 335 अरब मौलानाओं ने कहा है कि दारुल उलूम देवबंद इस्लाम का हिस्सा नही है। इस बात का आंकड़ा उनके पास कहां से आया है। वें ये भी बताए कि कौन सी किताब में और कौन से अखबार में यह लिखा है। मुफ़्ती ने नाजनीन अंसारी की ओर से दारुल उलूम को ही इस्लाम का हिस्सा नहीं मानने परउसकी अकल पर तरस खाते हुए उन्होंने कहा कि उनके बारें में हम क्या कह सकते हैं। उनकी इन बातों से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि वह इस्लाम से कितनी दूर हैं।
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यह है विवाद की मुख्य वजह
श्रीराम की आरती करने वाली मुस्लिम महिलाओं को देवबंदी उलेमाओं ने शरीयत की रोशनी में राय देते हुऐ कहा था कि नाजनीन अंसारी इस्लाम धर्म से खारिज हो गई हैं, क्योंकि इस्लाम एकेश्वरवादी मजहब है। जैसा कि एकेश्वरवाद के अर्थ से ही स्पष्ट होता है। ऐसा सिद्धांत, जहां सिर्फ एक ईश्वर के लिए स्थान है। अर्थात अगर कोई व्यक्ति एक अल्लाह के अलावा किसी दूसरे देवी-देवता की पूजा करता है तो वह स्वतः ही अपने कर्मों के कारण एकेश्वरवाद की परिभाषा में फिट नहीं बैठेगा। वही बात हमने भी कही है।
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मुफ्ती के बयान से भड़क गई थी नाजनीन
मुफ्ती के इस बयान पर नाजनीन अंसारी ने देवबंदी उलेमा पर पलटवार करते हुए कहा था कि फतवा देने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया जाए और ऐसे फतवा देने वाली संस्था को बंद करने की भी मांग की थी। इसके बाद जब उलेमा उनके खिलाफ पलटवार किया तो नाजनीन ने दारुल उलूम देवबंद को इस्लाम का हिस्सा मानने से ही इनकार कर दिया और कहा कि हजारों मौलवी दारुल उलूम देवबंद को इस्लाम का हिस्सा नहीं मानते हैं।