सपा सुप्रीमो जहां एक ओर PDA समीकरण बना रहे हैं वहीं इनके सांसद पर ही दलित की जमीन कब्जाने का आरोप लग रहा है। पीड़ित ने इस बावत डीएम से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है।
संतकबीर नगर जिले में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के PDA समीकरण का उन्हीं के सांसद धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिले के मेंहदावल तहसील क्षेत्र के अमरगढ़ गांव में एक दलित परिवार की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में पीड़ित ने सपा सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद पर पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर भूमि पर कब्जा कराने, सरकारी निशान हटवाने और विरोध करने पर धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है।
शुक्रवार को पीड़ित महेंद्र कुमार पुत्र विद्यानिवास ने DM से जनता दर्शन कार्यक्रम में मिलकर शिकायती पत्र सौंपा। बताया कि वह अनुसूचित जाति से है। गाटा संख्या 53/ 0.172 हे.का संक्रमणीय भूमिधर है। इस भूमि पर वह कृषि कार्य करता चला आ रहा है। इसके सटे अराजी संख्या 27 है जो ताल के रूप में स्थित है। आरोप है तालाब में मत्स्य पालन का दस वर्षीय पट्टा मत्स्यजीवी सहकारी समिति के नाम आवंटित किया गया है जिसमें सांसद के परिवार से जुड़े लोग शामिल हैं।
सांसद के कहने पर उनके भाई दिनेश पुत्र सतई निवासी बेलहर कला ने सहयोगियों के साथ उनकी भूमि पर जबरन बंधा बनवा दिया। विरोध करने पर उन्हें धमकाया। राजस्व विभाग ने पैमाइश कर जमीन की निशानदेही के लिए पत्थर गाड़े थे, लेकिन बाद में इसे उखाड़कर फेंकवा दिया गया। खेत में करीब पांच फीट गहरा गड्ढा खोदकर मिट्टी भी बेच दी गई। विरोध करने पर दोबारा धमकी दी गई। इस घटना के बाद परिवार दहशत में है। पीड़ित ने डीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध कब्जा हटवाने, उखाड़े गए सरकारी पत्थर दोबारा लगवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
DM आलोक कुमार ने भूमि कब्जाने के प्रकरण की जांच के लिए मेंहदावल के एसडीएम को निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यक्ति की भूमि पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। वहीं लक्ष्मीकांत सांसद ने कहा कि वर्ष 2017-18 में तालाब में मछली पालन का पट्टा मत्स्यजीवी सहकारी समिति के नाम से हुआ है, जिसकी देखरेख समिति के अध्यक्ष और सचिव करते हैं। बंधा निर्माण भी राजस्व विभाग द्वारा कराया गया था। शिकायतकर्ता ने भूमि की पैमाइश कराई थी और तालाब की कुछ भूमि को अपना बताया था, जो गलत है। निशानदेही के पत्थर उखाड़ने और भूमि खुदवाकर मिट्टी बेंचने सहित लगाए गए अन्य सभी आरोप निराधार हैं।