सतना

शासकीय एक्सीलेंस विद्यालय की वार्षिक पत्रिका में कॉपी किताब खरीदने का विज्ञापन

प्राइवेट स्कूलों को जिस बात के लिए जिला प्रशासन मना करता रहा वही बात सरकारी एक्सीलेंस विद्यालय धड़ल्ले से अपनी वार्षिक पत्रिका में कर डाली। वह भी तब जब कलेक्टर खुद यहां के अध्यक्ष हैं।

2 min read
May 14, 2026

सतना। एक ओर जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों में किताबों का काला कारोबार रोकने तमाम कवायद कर रहा है। कलेक्टर की ओर से स्कूलों को निर्देश तक जारी किए गए हैं कि किसी भी चिन्हित दुकानों से स्कूल सामग्री खरीदने के लिए विद्यार्थियों को न तो संदेश दिए जाएं और न ही उन्हें प्रेरित किया जाए। लेकिन जिस स्कूल की शाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष खुद कलेक्टर हैं, उस स्कूल की वार्षिक पत्रिका में न केवल निजी विज्ञापन दिए गए हैं बल्कि इनमें कुछ ऐसे भी विज्ञापन हैं जिसमें स्कूल की पूरी ड्रेस रखने का प्रचार प्रसार किया गया है। इतना ही नहीं इस पत्रिका में कई निजी महाविद्यालयों का भी प्रचार किया गया है जो कि किसी भी शासकीय पत्रिका में नहीं किया जा सकता है। वह भी तब जब इसी शहर में कई शासकीय कॉलेज हैं। स्पष्ट है कि यह विद्यालय स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को निजी शैक्षणिक संस्थाओं में जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

व्यावसायिक गतिविधि से जोड़ दी शैक्षणिक पत्रिका

दरअसल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व्यंकट क्रमांक 1 को जब उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दिया जा रहा था तो उसकी अनिवार्य शर्तों में से एक विद्यालय की पत्रिका का प्रकाशन शामिल था। इस लिहाज से उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वार्षिक शालेय पत्रिका 'इड़ा' का प्रकाशन प्रारंभ किया गया। इसकी प्रकाशन सामग्री के लिए बकायदे संपादकीय मंडल गठित किया जाता है और पूरी जांच पड़ताल के बाद किताब में मैटर का प्रकाशन होता है। लेकिन इस बार वार्षिक पत्रिका के प्रकाशन को मनमाने तरीके से व्यावसायिक गतिविधि से जोड़ दिया गया। जिसमें बकायदे विज्ञापन परिशिष्ट का प्रकाशन किया गया।

बिना अनुमोदन विज्ञापन का प्रकाशन

चूंकि विज्ञापन व्यावसायिक गतिविधि में आता है, लिहाजा इसके लिए शाला प्रबंध समिति से अनुमति अनिवार्य थी। इस विद्यालय की शाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष कलेक्टर हैं लिहाजा उनका अनुमोदन अनिवार्य था, जो कि नहीं लिया गया। इसके अलावा विज्ञापनों की दरों का निर्णय भी विद्यालय स्तर पर चिन्हित लोगों द्वारा ले लिया गया जबकि इन दरों का अनुमोदन भी कलेक्टर से लिया जाना चाहिए था।

स्कूल सामग्री और निजी कॉलेजों का विज्ञापन

स्कूल की वार्षिक पत्रिका में जो विज्ञापन प्रकाशित किए गए हैं, उनमें स्कूल सामग्री का प्रचार प्रसार भी शामिल है। जिसमें एक यूनिफार्म स्टोर का विज्ञापन शामिल है जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि आपके स्कूल का पूरा ड्रेस हम रखते हैं। जबकि इस तरह की गतिविधि के लिए निजी स्कूलों तक को अनुमति नहीं है। शहर में शासकीय स्वशासी महाविद्यालय और शासकीय कन्या महाविद्यालय सहित पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित है। जिले में शासकीय ग्रामोदय महाविद्यालय है। लेकिन स्कूल की पत्रिका में निजी महाविद्यालयो का प्रचार प्रसार विज्ञापन के रूप में किया गया है। जो की शासकीय हितों के विरुद्ध है।

"पत्रिका प्रकाशन के लिए संपादक मंडल नियुक्त किया गया है। विद्यालय की आंतरिक समिति ने विज्ञापन प्रकाशन का निर्णय लिया था। अभी बच्चों को पत्रिका नहीं दी गई है।"- कमलेश सिंह बघेल, प्राचार्य उत्कृष्ट उमावि व्यंकट 1

"स्कूल की वार्षिक पत्रिका में व्यावसायिक विज्ञापन वो भी निजी संस्थाओं के और स्कूल सामग्री के दिया जाना उचित नहीं है। इसके पहले शाला प्रबंधन समिति ने अनुमोदन जरूरी है। मामले में नोटिस जारी कर जानकारी ली जाएगी।" - गिरीश अग्निहोत्री, डीईओ

"इस मामले की जानकारी लेने के लिए डीईओ को निर्देशित कर रहे हैं। उनके प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।" - डॉ सतीश कुमार एस, कलेक्टर

Published on:
14 May 2026 10:00 am
Also Read
View All