सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर गोद लिए गए गांव पालदेव में मरीज को 80 किमी दूर तक डॉक्टर और इलाज नहीं मिलता। तीन साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन जावड़ेकर गांव के औषधालय में एक अदद डॉक्टर तक नहीं दिला सके।
ग्रामीणों को उपचार के लिए जिला अस्पताल सतना जाना पड़ता है। लोग आदर्श गांव कहे जाने के नाम से ही भड़क उठते हैं। पत्रिका को बताया गया कि, जब जावड़ेकर आते है उस दिन अधिकारियों की लाइन लग जाती है। और उनके जाते ही महीनों कोई फिरकर नहीं देखता है।
जनपद सदस्य रामानंद गुप्ता ने कहा, जावड़ेकर ने 13 लाख की लागत से पालदेव से ब्रजपुरा की सड़क व 15 लाख रुपए में पालदेव से बरगदहा पूर्वा का कार्य कराया है। पंचायत नए भवन में शिफ्ट हो चुकी है। स्कूल का उन्नयन हुआ। हायर सेकंडरी बनाकर नया भवन दिया।आदर्श ग्राम घोषित होने के बाद 10 लाख रुपए साफ-सफाई पर खर्च किए गए हैं। कच्ची सड़कों तक के किनारे नालियां बनाई गई।
जो रास्ता सदियों से खुला था वह आदर्श गांव घोषित होने के बाद बंद हो गया। इस रास्ते से थरपहाड़, यादव बस्ती, पालदेव हरिजन बस्ती सहित 8 मजरों का आवागमन है। जहां के रहवासी परेशान है। स्कूल का उन्नयन तो हायर सेकेंडरी में कर दिया पर, नए भवन में शिफ्ट होने के बाद बंद है। बच्चे खेतों की मेढ़ से गुजरकर स्कूल पहुंचते है।
पालदेव वासियों ने बताया, 3 वर्ष पहले जब जावड़ेकर जी ने गांव को गोद लिया तो सद्गुरु नेत्र अस्पताल जानकीकुंड ने मंत्री के सामने वादा किया था कि, इलाज के लिए अस्पताल भी पालदेव को गोद लेता है। विकास जावड़ेकर और इलाज जानकीकुंड अस्पताल करेगा। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने सिर्फ 3 से 4 महीने की बाद में ही स्वयं को अलग कर लिया।
पालदेव का सरकारी औषधालय सिर्फ कागजों में है। एक कंपाउंडर, एक भृत्य है। अस्पताल सुबह 10 से 12 तक खुलता है। पर, डॉक्टर नहीं है। कंपाउंडर भी हफ्ते में एक दो दिन वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे के समय आते है। झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी है।
महीनों से जले है ट्रांसर्फामर
पहाड़ी क्षेत्र में बिजली भी बड़ी समस्या है। दस्यु क्षेत्र होने के कारण विद्युत विभाग के जिम्मेदार रटा-रटाया जबाब लाइन फाल्ट का देकर फोन रख देते है। गांव में कई ट्रांसर्फामर है महीनों तक जले रहते है। अधिकारियों टाटमटोल करते हैं।
आयुष विभाग में डॉक्टरों की कमी है। फिलहाल, सांसद आदर्श गांव पालदेव के लिए डॉक्टर नहीं है। सिर्फ एक कंपाउंडर है। जितना हो सकता है, सुविधाएं दी जाती है।
प्रमोद शुक्ला, जिला आयुष अधिकारी सतना