सतना

वीडियो में देखें कैबिनेट मंत्री ने कैसे तोड़े नियम, दिल्ली से मिला नोटिस

सफारी में मंत्री के काफिले के घुसने पर प्रबंधन को नोटिस, फिल्मी हस्तियों को घुमाने का मामला
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Updated: 5 Jun 2018, 3:00 PM IST
CZA issued Notice to MP minister Rajendra shukla
CZA issued Notice to MP minister Rajendra shukla

रीवा। फिल्मी हस्तियों को मुकुंदपुर सफारी में उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल के घुमाने पर केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण ने प्रबंधन को नोटिस थमाया है। सप्ताहभर में प्रबंधन को बताना होगा कि किसकी अनुमति से वाहनों का काफिला सफारी में घुसा। कैसे वाहन वन्यजीवों के बाड़े तक पहुंचे।

पर्यावरणविद् अजय दुबे ने इसकी शिकायत की थी। उन्होंने वन्य जीव संरक्षण कानून का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि मंत्री शुक्ल ने इसका उल्लंघन किया है। सफारीडायरेक्टर संजय रायखेड़े ने पुष्टि की कि प्राधिकरण ने इ-मेल पर नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

ये है मामला
महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर और सफारी मुकुंदपुर एक बार फिर विवादों में आ गया है। एक दिन पूर्व प्रदेश के उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला द्वारा चिडिय़ाघर परिसर में वाहनों का काफिला लेकर प्रवेश करने और फिल्म अभिनेताओं को गोल्फ कार्ट की ड्राइविंग कर भ्रमण कराए जाने के मामले में की गई शिकायत पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने चिडिय़ाघर प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। प्रबंधन को यह बताना होगा कि किसकी अनुमति से वाहनों का काफिला चिड़ियाघर के भीतर जाने दिया गया और जानवरों के बाड़ों तक यह वाहन पहुंचते रहे।

निर्धारित शर्तों का उल्लंघन

बताया गया है कि इस मामले की शिकायत पर्यावरण एक्टिविस्ट अजय दुबे ने सेंट्रल जू अथॉरिटी से रविवार को ही कर दी थी। जिसमें उन्होंने वन्य जीव कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया है। इस मामले में चिडिय़ाघर प्रबंधन और वन विभाग के बड़े अधिकारी कुछ भी स्पष्ट रूप से कहने से बच रहे हैं।

चिड़ियाघर बंद रहने की भी शिकायत
रविवार को सुबह नौ बजे से तीन घंटे तक चिड़ियाघर बंद कराने की भी शिकायत हुई थी। जिसमें दूरदराज से आए पर्यटकों ने सोशल मीडिया पर अपनी समस्या का उल्लेख करते हुए कहा है कि पूर्व से उन्हें इस तरह की कोई सूचना नहीं थी कि चिडिय़ाघर तीन घंटे तक हम लोगों के लिए बंद रहेगा। यहां पहुंचने पर उनके पास वापस लौटने या फिर कड़ी धूप में इंतजार करने का ही विकल्प था। लोगों ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सहित केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया है।

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