
बारिश का मौसम, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Satna Monsoon news: इस साल एमपी के सतना जिले में मानसून ने संभावनाओं से ज्यादा बारिश की। कई क्षेत्रों में हालात तो इस तरह हो गए थे कि लोग बारिश बंद होने की प्रार्थना करने लगे थे। इस साल की बारिश में किसानों की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। सतना जिले में इस वर्ष सामान्य औसत वर्षा से 45.34 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। वहीं गत वर्ष की बारिश से तुलना करें तो इस अवधि तक गत वर्ष से 298 मिली मीटर ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इधर मानसून अब अपनी विदाई की बेला में आ गया है।
19 सितंबर से राजस्थान से मानसून की वापसी का पूर्वानुमान मौसम विभाग ने जारी किया है और 12 अक्टूबर तक सतना जिले से भी मानसून विदा हो जाएगा। भू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार सतना जिले की सामान्य औसत वर्षा 891.7 मिली मीटर है। जिसके विरुद्ध 14 सितंबर तक सतना जिले में 1296.4 मिली मीटर औसत बारिश हो चुकी है जो सामान्य औसत से 45.34 फीसदी ज्यादा है। आंकड़ों में अगर बात करे तो सामान्य औसत बारिश से इस वर्ष 404.7 मिलीमीटर ज्यादा बारिश हो चुकी है।
जिला मौसम कार्यालय के अनुसार अब जिले में तेज मानसूनी बारिश की संभावना काफी कम है। लोकल क्लाउड की वजह से कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। 10 से 12 अक्टूबर के बीच सतना जिले से मानसून भी वापस हो जाएगा। मानसून वापसी के दौरान कुछ इलाकों में जरूर बारिश हो सकती है। सोमवार को सतना का अधिकतम तापमान 32.8 तथा न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। सुबह की आर्द्रता 80 तथा शाम की 75 फीसदी दर्ज की गई है।
वर्षामापी केन्द्रों के अनुसार वर्षाकाल में सबसे ज्यादा बारिश मझगवां तहसील के बरौंधा क्षेत्र में 1615.8 मिमी दर्ज की गई है। यह बारिश जिले के सबसे कम 895 मिमी बारिश वाले नागौद तहसील के जसो क्षेत्र से 720.8 मिमी ज्यादा है। अन्य केन्द्रों की बारिश अगर देखें तो सतना में 1399 मिमी, सोहावल में 1333 मिमी, बिरसिंहपुर में 1443 मिमी, रामपुर बाघेलान में 1387 मिमी, नागौद में 1364 मिमी और उचेहरा में 934 मिमी बारिश दर्ज हुई है।
रामचरित मानस की चौपाइयों के अनुसार एक लोक परंपरा है कि कांस के फूल खिलने को बारिश का मौसम खत्म होने का संकेत माना जाता है। हालांकि सतना जिले में यह नजारे अब आम हो गए हैं। लेकिन देखा जाए तो इस वर्ष कांस के फूल अगस्त महीने के अंत में ही खिलना शुरू हो गए थे। इस मामले में वनस्पतिशास्त्री डॉ वीके सिंह बताते हैं कि कांस का फूलना मुख्य रूप से दिन रात की अवधि से नियंत्रित होता है। जैसे जैसे मानसून के बाद दिन छोटे होने लगते हैं पौधे में पुष्पन की प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन फूल दिखने में तापमान, नमी और बारिश के दिन सहित स्थानीय मौसम असर डालते हैं।
लिहाजा अच्छी बारिश और अधिक रेनी डेज पुष्पन के अनुकूल स्थिति बना सकते हैं। इसके साथ अधिक आर्द्रता और कम तेज धूप वाले दिन फूलने के लिए सकारात्मक वातावरण माने जाते हैं। सतना जिले में यह स्थितियां इस वर्ष रहीं जिससे कांस समय से पहले फूल गया है। हालांकि फिर भी इसे एक संकेत माना जा सकता है कि वातावरण में बदलाव आ रहा है जो बारिश के प्रतिकूल स्थितियों को दिखा रहा है, जो कांस फूलने के अनुकूल है।
Updated on:
15 Sept 2026 11:17 am
Published on:
15 Sept 2026 10:27 am
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