
सतना। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से अपने दल से निकाले जाने के बाद नाराज 12 वर्षीय 'जेन अल्फा' हाथी ई-5 मैहर जिले के गोरसरी घाटी में पहुंचा था। उसकी नाराजगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने बिना रुके लगातार 12 घंटे चलते हुए 70 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें बाणसागर जलाशय का 5 किलोमीटर का हिस्सा तैर कर पार किया। मौसम की प्रतिकूलता और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसके घर वापसी की प्रक्रिया वन विभाग शुरू नहीं कर पा रहा है। लिहाजा स्थिति अनुकूल होने तक इसकी सख्त निगरानी की जा रही है। उधर इस ई-5 हाथी ने बुधवार 9 सितंबर की रात को ओबरा में लीलाधर तिवारी के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया है और कई लोगों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि वन विभाग ने काफी मशक्कत के बाद इसे ग्रामीण इलाके से दूर वापस गोरसरी घाटी क्षेत्र में भेज दिया है।
मैहर वनमंडल अंतर्गत अमरपाटन रेंज के गोरसरी बीट में घूम रहा जेन-अल्फा ई-5 हाथी काफी उग्र स्वाभाव का है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सूत्रों के अनुसार मई महीने में इसी जेन अल्फा ई-5 ने शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र में तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। यह काफी उग्र स्वाभाव का 12 वर्षीय किशोर हाथी है, जिसकी अपने दल में भी ज्यादा नहीं बनती है। शहडोल की घटना के बाद इसे काबू में करने कुमकी ऑपरेशन चलाया गया था, जिसमें प्रशिक्षित कुमकी हाथियों ने इसे घेर कर कैद किया था। जिसके बाद इसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के हाथी कैंप में लाया गया। जहां इसकी सघन निगरानी के लिए कॉलर आईडी पहनाई गई थी। बताया गया है कि बांधवगढ़ से इस समय दो जेन अल्फा हाथियों की निगरानी की जा रही है। जिसमें एक तो मैहर जिले में आया यही ई-5 हाथी है और दूसरा कान्हा नेशनल पार्क से इसी तरह भाग कर बैतूल पहुंचा इसी उम्र का एक हाथी शामिल है।
बताया गया है कि मैहर जिले में आतंक मचा रहे इस ई-5 हाथी को पकड़ने के लिए भी कुमकी आपरेशन चलाया जाएगा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाए गए विशेष प्रशिक्षित कुमकी हाथियों के जरिए इस जेन अल्फा हाथी को पकड़ा जाएगा। इसके लिए कुमकी हाथियों के द्वारा ई-5 की घेराबंदी करके उसे एक ट्रक तक लाया जाएगा। जहां उसे कुमकी हाथियों द्वारा बल पूर्वक ट्रक पर चढ़ाया जाएगा। इसके बाद उसे ट्रैंकुलाइज किया जाएगा, फिर उसे बांधवगढ़ हाथी कैंप ले जाया जाएगा। लेकिन अभी इस तरह की स्थिति नहीं बन पा रही है। लिहाजा माकूल वक्त का इंतजार किया जा रहा है। ई-5 मैहर वन मंडल में आने के बाद यहां भी एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार चुका है।
ई-5 हाथी उग्र जेन अल्फा है। लिहाजा इसकी सघन निगरानी की जा रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि इससे जितना ज्यादा दूर रह सकते हैं उतना दूर रहे। उसे चौंकाने वाली या परेशान करने वाली गतिविधियां नहीं करने की अपील भी लोगों से वन विभाग ने की है। डीएफओ मैहर विद्याभूषण मिश्रा ने बताया है कि इस हाथी ने 9 से 10 सितंबर के बीच गोरसरी पहाड़ से नीचे उतर कर मानव आबादी वाले क्षेत्र के ग्राम किरहाई, ओबरा, छिरहाई, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा, छांइन आदि क्षेत्रों में विचरण करता रहा है। इस दौरान कच्चे घरों और फसलों को इसने नुकसान पहुंचाया है। हालांकि 10 सितंबर के दिन को वह गोरसरीपहाड़ी की ओर निकल गया था। लेकिन रात को फिर से इन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में आ सकता है। डीएफओ ने कहा है कि हाथी को टार्ज या तेज रोशनी नहीं दिखाए। खेत में अगर फसल नुकसान कर रहा है तो उसे भगाने के प्रयास में निकट न जाएं। फसल हानि पर तय नियमों के अनुसार क्षतिपूर्ति प्रावधानित है। जंगल के किनारे हाथी के विचरण के दौरान कच्चे मकानों में निवास न करने की सलाह भी दी गई है। डीएफओ ने कहा है कि विगत रात्रि भी हाथी के मूवमेंट के अनुसार लोगों को घरों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
मध्यप्रदेश में ही देश के सबसे बड़ा कुमकी आपरेशन को वर्ष 1994 में अंजाम दिया गया था। तब के अविभाजित मध्यप्रदेश में बिहार से भागकर 22 हाथियों का दल सरगुजा पहुंचा था। कई लोगों की जान लेने के साथ इस दल ने इस क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया था। तब कर्नाटक से कुमकी हाथियों का दल सरगुजा बुलाया गया था। इसके बाद उग्र जंगली हाथियों को काबू करने कुमकी आपरेशन 'द लास्ट माइग्रेशन' शुरू किया गया था, जिसका नेतृत्व कुमकी हाथी अभिमन्यु कर रहा था। दो सप्ताह चले इस आपरेशन में सभी जंगली हाथियों को नियंत्रित कर लिया गया था। कुमकी हाथी उन प्रशिक्षित हाथियों को कहा जाता है जिनका उपयोग वन विभाग द्वारा जंगली या बेकाबू हाथियों को नियंत्रित करने, उन्हें पकड़ने या वापस जंगल में खदेड़ने के लिये किया जाता है।
Updated on:
11 Sept 2026 01:18 pm
Published on:
11 Sept 2026 10:57 am
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