सतना

MP के इस जिले में रोजाना बाघ-तेंदुआ कर रहे हमला, प्रदेशव्यापी हड़ताल से खतरे में लोगों की जान

सड़कों पर वनों के रक्षक, वन्य जीवों और संपदा के सुरक्षा पर खतरा, दो दिनों से आंदोलन में एक हजार से अधिक वन कर्मचारी

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May 25, 2018
forest department strike in Panna Madhya Pradesh

पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व सहित उत्तर वन मंडल और दक्षिण वन मंडल के करीब एक हजार वनकर्मी बीते दो दिनों से लगातार हड़ताल पर हैं। वन कर्मियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पन्ना जिले में ही देखने को मिला। हड़ताल के पहले ही दिन जहां एक ओर रैपुरा क्षेत्र में तेंदुए ने आतंक मचाकर 16 लोगों को घायल कर दिया वहीं दूसरी ओर उत्तर वन मंडल के मनकी बीट में बाघ ने तेंदूपत्ता तोडऩे गए एक युवक पर हमला कर उसकी हत्या कर दी।

हड़ताल के दूसरे दिन भी तेंदुए ने रैपुरा क्षेत्र में आतंक मचाया और चार अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। वनकर्मियों के हड़ताल में रहने से विभाग को बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की लोकेशन नहीं मिल पा रही है, जिससे इस तरह के हादसे घटित हो रहे हैं। इसके साथ ही हड़ताल के कारण वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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ये है मामला
गौरतलब है कि जिल के वन अधिकारी और कर्मचारी दो दिनों से लागातार अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल में जिले के दक्षिण वनमंडल पन्ना, उत्तर वनमंडल पन्ना एवं पन्ना टाइगर रिजर्व पन्ना के १6 रेंजर, 27 डिप्टी रेंजर, 91 वनपाल, 410 वनरक्षक के अतिरिक्त 469 स्थायी कर्मी कुल 1013 अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर जाने की बात कही गई है। रेंजर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार ने बताया, मप्र. रेंजर एसोसिऐशन एवं मप्र.वन कर्मचारी संघ के संयुक्त आह्वान पर 19 सूत्रीय मांगों के लेकर दूसरे दौर की अनिश्चितकालीन हड़ताल डायमंड चौराहा जगात चौकी पन्ना में शुक्रवार से चल रही है।

पुलिस की तरह मिले वेतन
उन्होंने बताया आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जिले के अंतर्गत कम वेतन पा रहे वन कर्मचारी एवं अधिकारी को शासन से न्याय उचित वेतन भत्ता दिए जाने, स्वास्थ्य सुविधा एवं 8 घटे की ड्यूटी के साथ-साथ उनके कर्तव्य क्षेत्र में होने वाली वनोपज हानि की वसूली रोकने सहित अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आंदोलनकारियो ने बताया अन्य प्रमुख मांगों में रेंजर को पुलिस के टीआई, डिप्टी रेंजर को पुलिस के एसआई एवं वनरक्षक को पुलिस के हेड कांंसटेबल के बराबर वेतन मिलना चाहिए। लेकिन शासन ने उनकी वेतन विसंगति को 2007 के बाद यथावत रखा है। जिससे वन कर्मचारी एवं अधिकारी रात दिन 24 घंटे तपी गर्मी, बरसात एवं ठंड में अपनी सेवाएं दे रहे है।

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Published on:
25 May 2018 06:14 pm
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