सतना

लहसुन का खेल: गैर लाइसेंसी कारोबारी का ट्रक छोड़ने रविवार को खोला दफ्तर

फर्जी अंतरराज्यीय परमिट पर लहसुन का लाखों का काला कारोबार करने वाले व्यापारियों पर प्रशासन इतना मेहरबान हुआ कि उनके वाहन छोड़ने के लिए रविवार को दफ्तर खोल दिया।
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Updated: 3 Nov 2026, 8:59 AM IST
lahsun satna

सतना। शासन द्वारा अवैध घोषित की जा चुकी डिलौरा सब्जी मंडी के व्यापारी द्वारा अवैध तरीके से मंगाई गई लहसुन के मामले में मंडी सचिव सवालों के घेरे में आ गए है। शनिवार को जिस लहसुन से भरे ट्रक को पकड़ा गया था उसे छोड़ने के लिए रविवार को मंडी का दफ्तर खोला गया। इस मामले में बिना गंभीर कार्रवाई किए महज जुर्माना और समझौता शुल्क वसूल कर छोड़ दिया गया। जबकि इस मामले में मंडी अधिनियम के तहत सामग्री जब्त कर गैर लाइसेंसी कारोबारी पर एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए थी। मामले में मंडी सचिव ने कहा कि एसडीएम की अनुमति के बाद कार्रवाई हुई है तो एसडीएम ने इससे साफ इंकार किया है।

मंडी कार्यालय द्वारा बताया गया है कि गैर लाइसेंसी कारोबारी द्वारा प्रयागराज के परमिट पर 30 क्विंटल लहसुन मंगाई गई थी। जिसे जांच के दौरान ट्रक सहित जब्त कर लिया गया था। रविवार को इस मामले में शमन शुल्क और समझौता शुल्क जमा कर छोड़ा गया है। शमन शुल्क के संबंध में बताया गया कि 30 क्विंटल लहसुन की कीमत 4.41 लाख रुपए थी। जिसकी 5 गुना कीमत के आधार पर मंडी फीस 33148 रुपए शमन शुल्क के रूप में जमा करवाई गई है। इसी तरह से समझौता शुल्क 5 हजार रुपए जमा करवाया गया है।

सवालों में कार्रवाई

बिना लाइसेंस के गलत परमिट बनवा कर चटनी मसाले का कारोबार यहां संगठित तरीके से हो रहा है। चूंकि मध्यप्रदेश के अंदर लाइसेंसी व्यापारी को ही अधिसूचित चटनी मसाले प्रदाय किए जाते हैं। लहसुन की उपज अधिसूचित चटनी मसाले में आती है। लिहाजा किसी भी मंडी से इसे लाइसेंसी कारोबारी को ही दिया जाता है। सतना में इसका कारोबार बिना लाइसेंस के किया जा रहा है। इसलिये कारोबारी इलाहाबाद के फर्जी फर्म के नाम पर परमिट बनवा लेते हैं। चूंकि गैर लाइसेंसी कारोबारी द्वारा लहसुन मंगाने का मामला था, ऐसे में मंडी सचिव को मंडी अधिनियम की धारा 23(2) के परन्तुक के तहत कार्रवाई करनी थी। जिसके तहत अधिसूचित उपज को राजसात करने की कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन इसमें अगर समझौता और शमन की कार्रवाई करनी है तो मंडी समिति की अनुमति लेनी जरूरी है। चूंकि अभी मंडी समिति अस्तित्व में नहीं और इसके प्रशासक एसडीएम सिटी है। लिहाजा इस कार्रवाई के लिए एसडीएम से अनुमति अनिवार्य थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। सचिव ने प्रशासक से कोई लिखित अनुमति लिए बिना अवकाश के दिन दफ्तर खोल कर पूरी कार्रवाई कर डाली।

मंडी समिति सीहोर की नहीं की जांच

चूंकि जो वाहन पकडा गया था उसका अनुज्ञा पत्र अंतरराज्यीय व्यापार के लिए था। ऐसे में सीहोर मंडी से भी प्रक्रियागत सवाल मंडी सचिव को करना चाहिए कि कैसे बिना वैधानिक फर्म की मौजूदगी के अनुज्ञा पत्र जारी कर रही है। अगर वैधानिक फर्म द्वारा अनुज्ञा पत्र जारी करवाया जा रहा है तो इस कालाबाजारी के लिए संबंधित इलाहाबाद की फर्म को भी दोषी बनाया जाना था। इससे संगठित अवैध कारोबार का खुलासा होता। क्योंकि यह इकलौता केस नहीं है। इस तरह के तीन अन्य मामले भी उसी मडी में पकड़े गए थे जो इलाहाबाद के अनुज्ञा पत्र पर यहां लहसुन लाकर कारोबार कर रहे हैं। लेकिन मंडी सचिव ने यह भी नहीं किया।

मंडी सचिव की मजेदार सफाई

मामले में मंडी सचिव करुणेश तिवारी ने इस मामले में मजेदार सफाई दी है। कहा, बड़ी कार्रवाई इसलिए नहीं की क्योंकि उनमें काफी परेशानी और लंबी प्रक्रिया करनी होती है। बाद में न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जहां तक मंडी समिति से अनुमति की बात है तो एसडीएम से इसकी मौखिक अनुमति ले ली थी। अवकाश के दिन इसलिए छोड़ने की कार्रवाई की गई क्योंकि ट्रक बाहर का था और मालिक परेशान था।

एसडीएम ने झाड़ा पल्ला

वहीं इस मामले में एसडीएम सिटी एवं मंडी प्रशासक राहुल सिलाडिया ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में मैंने किसी भी तरह से ट्रक छोड़ने की अनुमति नहीं दी है। कहा, शमन शुल्क और समझौता शुल्क जमा करवाने के बाद बैक डेट में बाद में लिखित अनुमति कैसे दे सकते हैं। अब कौन सच है और झूठ बोल रहा है यह तो जांच होने पर ही पता चलेगा। वैसे इस मामले में कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने ध्यान देने की बात कही है।

Updated on:
3 Nov 2026, 8:59 AM IST
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