
सतना। दस्यु सरगना ललित पटेल को पुलिस ने मात्र आधे घंटे की मुठभेड़ में मार गिराया। इसके बाद ललित के खौफ का अंत हो गया। विगत माह ललित ने तीन ग्रामीणों को जंगल में जलाकर मार डाला था, तभी से इलाके में इसकी दहशत और बढ़ गई थी। वहीं से यह सतना पुलिस के निशाने पर था।
सूचना मिली तो पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई
पुलिस ने जहां इसके मददगारों को गिरफ्तार किया वहीं दो बार मुठभेड़ में बच निकला। लेकिन, जब रविवार शाम पुलिस को ललित पटेल के बारे में सूचना मिली तो पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई। फौरन नयागांव थाना पुलिस के जवानों को पोखरवार जंगल के पास पड़ाव डालने भेजा गया।
दो टीमें बनाकर घेराबंदी शुरू
सतना एसपी राजेश हिंगणकर ने एडी टीम के प्रभारी अनिमेष द्विवेदी के साथ दो टीमें बनाकर घेराबंदी शुरू की। देर शाम को कुछ अंधेरा होने पर पुलिस टीम को जंगल में गैंग की मौजूदगी की पुष्टि हो गई। लोकेशन को घेर लिया गया और अतिरिक्त पुलिस फोर्स भी बैकअप के लिए बुला लिया गया।
डकैतों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी
अचानक पुलिस की मौजूदगी की जानकारी होते ही डकैतों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस टीम ने दोनों तरफ से फायरिंग शुरू की। इसमें एक डकैत मारा गया और उसके मरते ही बाकी बचे तीन साथी भागने में सफल रहे। एसपी सतना ने बताया, मुठभेड़ खत्म होने के लगभग आधे घंटे बाद पुलिस टीम मरे डकैत के पास पहुंची, तो उसकी शिनाख्त गैंग सरगना ललित पटेल के रूप में की गई।
दो दर्जन खोखे बरामद
पुलिस की मानें तो उसकी ओर से करीब २०-२२ राउंड फायर किए गए। मौके से लगभग दो दर्जन खोखे बरामद हुए। एक ३१५ बोर रायफल व १९ जिंदा कारतूस का पट्टा डकैत ललित के पास पड़ा मिला। उसके पास एक बैग भी मिला है, जिसमें खाद्य सामग्री थी। बचे गैंग के सदस्यों की तलाश की जा रही है।
अपराध बढ़ते गए
बताया जाता है कि ललित ने पहले एक बैंक कर्मचारी को धमकाया था और रंगदारी मांगी थी। उसके बाद १४ जनवरी २०१७ को पहला अपहरण जानकीशरण गोड़ नामक युवक का किया और इसके खिलाफ अपराध कायम हुआ। इसके बाद इसने जुगुलपुर गांव से एक डॉक्टर को अगवा कर फिरौती वसूली थी। खरहा सरपंच ललित किशोर पटेल व टेढ़ी गांव के सरपंच जीतू पटेल से रंगदारी मांगी थी। इस तरह हत्या, अपहरण, लूट व रंगदारी समेत इसके खिलाफ दस प्रकरण कायम हैं।
डकैतों पर भारी जुलाई-अगस्त
जुलाई-अगस्त का महीना तराई के डकैतों के लिए भारी पड़ता है। तराई के अधिकतर बड़े डकैत जुलाई-अगस्त में मारे गए हैं। इनमें सरगना ददुआ, ठोकिया **** सुंदर पटेल उर्फ रागिया, स्वदेश पटेल उर्फ बलखडिय़ा, रामचंद्र पटेल, ज्ञान सिंह परिहार, शिवमूरत पटेल उर्फ सिपाही, मइयादीन पटेल उर्फ लमझगड़ बाबा और राजकरन पटेल जैसे कई नाम शामिल हैं। अब ललित भी शामिल हो गया। शुरुआत ठोकिया के चाचा राजकरन पटेल उर्फ चच्चू से हुई।
अजब संयोग
15 अगस्त 2006 में एसटीएफ ने रायबरेली से राजकरन और ठोकिया के छोटे भाई दीपक को दबोच लिया। बाद में इलाहाबाद के छोटा बघाड़ा चौराहे में राजकरन को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। 23 जुलाई 2007 को अनुसुइया आश्रम के पास मुठभेड़ में ठोकिया का खास साथी मइयादीन पटेल उर्फ लमझगड़ पुलिस की गोली से ढेर हो गया। 4 अगस्त 2008 को दस्यु सरगना ठोकिया अपने ही गांव सिलखोरी में मारा गया। 2 जुलाई 2015 को मारकुंडी क्षेत्र के किहुनियां जंगल में बलखडिय़ा को पुलिस मुठभेड़ में गोली लग गई।
ग्रामीणों को पलायन के लिए किया था मजबूर
थरपहाड़ के ग्रामीणों के लिए ललित किसी आतंक से कम नहीं था। उसके नाम की दहशत ऐसी थी कि ग्रामीण नाम सुनते ही घरों में दुबक जाते थे। ललित ने मुन्ना यादव की हत्या करने के बाद परिवार को भी धमकी देना शुरू कर दिया था। साफ कहता था कि इतने लोगों की १३वीं मनानी पड़ेगी कि गिन नहीं सकोगे। इसका परिणाम हुआ कि मुन्ना यादव के परिवार **** करीब दो दर्जन ग्रामीणों ने थरपहाड़ से पलायन कर लिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को मदद देने का भरोसा भी नहीं दिया, क्योंकि पुलिस डकैतों के आंतक को तत्काल खत्म करने की स्थिति में नहीं थी।
अब तराई में तीन गिरोह
ललित के मारे जाने के बाद तराई में अब भी डकैतों का आतंक है। तराई में तीन गिरोह ऐसे हैं, जिनकी दहशत पूरे क्षेत्र में बोलती है। वे अपहरण, लूट व हत्या की वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस इनकी वारदातों पर नियंत्रण करने की स्थिति में नहीं है। इसमें कुख्यात डाकू बबुली कोल भी शामिल है, जो पांच लाख तीस हजार का इनामी है। इसी तरह पचास हजार का इनामी लवलेश कोल और एक लाख का इनामी गौरी यादव प्रमुख रूप से हैं। इन गैंगों में कई हार्डकोर सदस्य हैं। साथ ही अपराधी गैंग में शामिल होकर वारदात करते रहते हैं। एक गैंग लीडर गोप्पा भी था, जो विगत दिनों यूपी एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। अब गिरोह की कमान भइय्यन के हाथ में है।
टॉस्क पूरा हुआ
एसपी राजेश हिंगणकर ने कहा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि चित्रकूट में डकैत नहीं रहेंगे। वहीं डीजीपी व आईजी ने टास्क दिया था। मेरा पहला टॉस्क पूरा हुआ। मंैने १७ जुलाई को ज्वाइन किया था और निर्णय लिया था कि जब तक डकैत को नहीं मारूंगा, चेंबर में नहीं बैठूंगा। ज्वाइन करने व प्रेस कॉफ्रेंस के अलावा चेंबर में नहीं गया। अब पूरा फोकस सतना शहर को लेकर रहेगा। वहीं जंगल में टीमें सर्चिंग व कॉम्बिंग करती रहेंगी, ताकि डकैत कोई बड़ी वारदात न कर सकें।
गोप्पा की गिरफ्तारी के बाद मारा जाना तय था
तराई में एक लाख पांच हजार का इनामी डकैत गोप्पा पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। सूत्रों की मानें तो गोप्पा को निपटाने के लिए यूपी पुलिस ने शुरू में ललित को खड़ा किया था और पर्दे के पीछे से संरक्षण देने में लगी थी। गोप्पा गैंग पर जब हर तरफ से दबाव बनने लगा और ऐसी स्थिति बन गई कि गोप्पा किसी दिन भी मुठभेड़ में मारा जा सकता है तो उसने अपने दस्यु गुरु गौरी यादव से संपर्क साधा। इसके बाद यूपी एसटीएफ के कुछ खास लोगों की मदद से रणनीति बनाई गई और गोप्पा की गिरफ्तारी हो गई। इस तरह उसकी जान भी बच गई और एसटीएफ को सफलता भी मिल गई। इसके बाद से माना जा रहा था कि डकैत ललित यूपी पुलिस के किसी काम का नहीं है। उसका मारा जाना तय है। ऐसा हुआ भी, एमपी पुलिस ने मुठभेड़ में ललित को मार गिराया।
ललित तेरहवीं में शामिल होकर निकल गया
तीन लोगों को जिंदा जलाकर मारने व हेडमास्टर के अपहरण के बाद मप्र पुलिस ललित पटेल को लेकर गंभीर थी। बताया जाता है कि १६ जुलाई के आस-पास ललित अपने गैंग के साथ तेरहवीं में शामिल होने पौसलहा गांव पहुंचा था। वहां बकायदा भोजन किया और आधा घंटे तक रुका भी। उसके बाद वह गैंग **** जंगल में फरार हो गया। पुलिस को दूसरे दिन भनक लगी तो गांव पहुंच कर पूछताछ शुरू की।
मैहर विधायक ने की वेतन देने की घोषणा
ललित को मारे जाने के बाद मैहर विधायक ने अपना एक माह का वेतन बतौर इनाम देने की घोषणा की। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री से पूरी टीम को प्रशस्ति पत्र देने के लिए बात करूंगा। इसी तरह शिक्षक संघ ने भी एक दिन का वेतन सतना पुलिस को बतौर पुरस्कार देने की घोषणा की है।
हाल ही में बना था एक लाख रुपए का इनामी
डकैत ललित पटेल पर सतना पुलिस ने एक लाख का इनाम घोषित करने का प्रस्ताव हेड क्वॉटर को भेजा था। जिसे हाल ही में मंजूर किया गया था। उसके बाद उसकी दहशत का माहौल बन गया था। और, उसने गतिविधियां बढ़ा दी थीं। लिहाजा, उसका मारा जाना तय था। रविवार को हुई मुठभेड़ को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ग्रामीणों ने की शिनाख्त
पुलिस ने ललित के मारे जाने की पुष्टि कर ली थी। लेकिन, अपने संदेह को दूर करने के लिए कुछ स्थानीय ग्रामीणों को मौके पर बुलाया। उन्होंने भी ललित के मारे जाने की पुष्टि की। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और मौका मुआयना करते हुए पूरे क्षेत्र की जांच की।
ये रहे टीम में
ललित को निपटाने में कई पुलिस अधिकारी व कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इसमें एसपी राजेश हिंगणकर, एसडीओपी मैहर व्हीडी पांडेय, एसडीओपी चित्रकूट आलोक शर्मा, टीआई रामपुर अनिमेष द्विवेदी, नयागांव थाना प्रभारी सुधांशु द्विवेदी, बरौंधा थाना प्रभार वाईएस जयसूर, सब इंस्पेक्टर ओपी चोंगड़े, फॉरेसिंक टीम में रीवा से आरपी शुक्ला फॉरेंसिक अधिकारी, सतना से अनिल विश्वकर्मा, मुकेश यादव व फिंगर प्रिंट विशेषज्ञ वीरेंद्र पटेल **** अन्य शामिल रहे।
टाइम लाइन
- दोपहर २.४५ बजे एसपी को सूचना।
- दोपहर २.५० बजे जंगल में सर्चिंग कर रही एक टीम को मौके पर
रवाना किया।
- दोपहर ३.०० बजे दूसरी टीम के साथ एसडीओपी मैहर को लेकर रवाना।
- शाम ४.०० बजे मौके पर पहुंचे, घेराबंदी शुरू।
- शाम ४.३० पर मुठभेड़ शुरू।
- शाम ५.०० बजे गोली फायर बंद हुआ।
- शाम ५.३० बजे पुलिस ने जंगल सर्चिंग शुरू की।
- शाम ५.४० बजे डकैत ललित का शव जंगल में मिला।
- शाम ६.०० बजे ललित के मारे जाने की पुष्टि हो गई।