मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से 5 माह में तीसरी मौत हो गई। यह साबित कर रहा है कि कुपोषण को लेकर यहां कोई गंभीरता नहीं बरती जा रही है। तीनों मौते मझगवां ब्लाक में ही हुई हैं।
सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण की भयावह तस्वीर सामने आई है। बुधवार 22 अप्रैल को गंभीर कुपोषित एक बच्ची की मौत हो गई। उसका जुड़वा भाई भी गंभीर कुपोषण का शिकार है, जिसे जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया है। उधर कुपोषण से मृत बच्ची के मामा ने गंभीर आरोप लगाया है कि बच्ची शव घर न लाकर आशा कार्यकर्ता ने बीच रास्ते मझगवां में भी अंतिम संस्कार करवा दिया है। इधर कुपोषण से मौत का मामला सामने आने पर कलेक्टर ने सीडीपीओ, सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित एएनएम को नोटिस जारी किया है।
विभागीय लापरवाही बनी वजह
विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक हीलाहवाली का नतीजा यह है कि एक माह के अंदर मझगवां विकासखंड में फिर एक मासूम बच्ची की कुपोषण से माैत हो गई। मध्यप्रदेश में कुपोषण के लिए कुख्यात मझगवां विकास खंड के सुरांगी निवासी 4 माह की मासूम सुप्रांशी की 22 अप्रैल को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उसे गंभीर कुपोषण और डिहाइड्रेशन की स्थिति में जिला अस्पताल में 21 अप्रेल को भर्ती कराया गया था। इसके साथ जुड़वा भाई नैतिक को भी कुपोषण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसे गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज रीवा भेज दिया गया। इसके पहले महतैन में भी एक मासूम की कुपोषण से मौत हुई थी। जिसके बचाव में विभाग ने पूरी ताकत लगाते हुए बिना पीएम के ही यह दावा कर दिया था कि स्तनपान सही तरीके से नहीं कराने के कारण दूध अटकने से मौत हुई। जबकि पिता का आरोप था कि उसे सूखा रोग था। हद तो यह हो गई कि अपनी गर्दन बचाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास के जनप्रतिनिधि और स्थानीय कर्मचारी सहित महिला बाल विकास के कर्मचारियों ने इतना दबाव डाला था कि बाद में पिता ने सूखा रोग के बयान पर चुप्पी साध ली थी। इस मामले में कोई कार्यवाही न करते हुए नोटिस का खेल खेला गया था। हालांकि जब बुधवार को सुप्रांशी की मौत का मामला तूल पकड़ता देख महतैन में हुई मौत की दोषी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सेवा समाप्त की गई। जबकि यह कार्यवाही काफी पहले की जा सकती थी।
जिसकी सेवा समाप्त उसे फिर बनाया कार्यकर्ता
महिला बाल विकास विभाग कुपोषण को कितनी गंभीरता से लेता है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसी सुरांगी गांव में 2 साल पहले कुपोषण से सोमवती नामक बालिका की मौत हो गई थी। इस मामले में दोषी पाई गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूरा पांडेय की सेवा समाप्त कर दी गई थी। लेकिन बाद में विभाग ने इसी कार्यकर्ता को फिर से इसी गांव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी दे दी। नौकरी गंवाने के बाद दोबारा नौकरी मिलने पर पूजा का मनमानी राज चालू हो गया। मृत सुप्रांशी की मां का आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। उनके आरोप की पुष्टि इस बात से भी होती है कि इसी गांव में हाल में कैंप लगाया गया था। लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस कैंप तक में सुप्रांशी और उसके भाई नैतिक को नहीं लाई। इसकी पुष्टि बीएमओ भी करते हैं। जबकि इस कैंप में कुपोषण सहित विभिन्न मामलों का न केवल परीक्षण किया गया बल्कि इलाज भी किया गया।
जहां होनी थी किलकारी वहां मातम
घर में किलकारियां गूंजने की उम्र में मातम पसरा है। चार माह पहले जिन जुड़वा बच्चों के जन्म पर परिवार में खुशियां मनाई गई थीं, अब वही घर गहरे सदमे में डूबा है। कुपोषण और बीमारी की मार झेल रही एक मासूम बेटी ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि उसका भाई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। मंगलवार की शाम जब परिजन दोनों बच्चों को गोद में उठाकर मझगवां अस्पताल पहुंचे, तो उनके चेहरों पर डर और उम्मीद दोनों साफ नजर आ रहे थे। बच्चों की हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें रेफर कर जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती किया गया। डॉक्टरों की टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन करीब 20 घंटे की जद्दोजहद के बाद बुधवार शाम करीब 5 बजे मासूम सुप्रांशी ने मां की गोद में ही अंतिम सांस ले ली।
2 घंटे वेंटीलेटर पर थी सुप्रांशी
कुपोषण की चपेट में आ चुकी बच्ची मंगलवार को ही गंभीर थी, जिसका चिकित्सकों ने इलाज शुरु किया। बुधवार की सुबह तक सुप्रांशी के स्वास्थ्य में कुछ सुधार दिखा,लेकिन दोपहर से ही तबियत फिर बिगड़ने लगी। बीपी कम होने के साथ ही हार्ट रेट बढ़ने लगा। दवाईयों में बदलाव करने के साथ ही दोपहर 2 बजे के लगभग सुप्रांशी को वेंटीलेटर पर रखना पड़ा। हालांकि करीबन 2 घंटे बाद सुप्रांशी की सांसे थम गई।
कमजोर शरीर, भारी बीमारी
कुपोषण की चपेट में सुप्राशी का वजन 2.862 किलोग्राम और नैतिक का 2.953 किलोग्राम दर्ज किया गया था। डॉक्टरों के अनुसार दोनों बच्चों का वजन उम्र के हिसाब से काफी कम था। जबकि इस उम्र में बच्चों का सामान्य वजन लगभग 3.5 से 4 किलोग्राम होना चाहिए। कम वजन के चलते दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में आ गए हैं। सांस लेने में तकलीफ, खून की कमी और निमोनिया ने उनकी हालत और गंभीर बना दी थी। दरअसल नैतिक और सुप्रांशी पिछले 15 दिनों से बच्चे उल्टी, दस्त एवं बुखार से पीडित थे। जिनका इलाज जुगुलपुर निवासी झोलाछाप डाक्टर के द्वारा किया जा रहा था। 16 दिन में 5 बार झोलाछाप डॉक्टर के द्वारा इलाज किया गया।
प्रबंधन ने एंबुलेंस में रीवा भेजा
जिला अस्पताल सतना से कुपोषित बच्चे नैतिक को मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर किया गया। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण रास्ते में इलाज की सुविधा भी मिलती रहे,इसके लिए प्रबंधन ने एंबुलेंस में मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेसीडेंट डॉक्टर को भी भेजा था। इसके साथ ही अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ भी रीवा पहुंचने तक सतत संपर्क में थे।
महिला की थी चौथी डिलीवरी
पथरा सुरांगी निवासी विमला प्रजापति ने 20 दिसंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझगवां में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। जन्म के समय एक बच्चे का वजन 2.00 किलो और दूसरे का 1.90 किलो था। महिला चौथी बार गर्भवती हुई थीं। परिवार में पहले से 5 वर्ष की एक बेटी और 2 वर्ष का एक बेटा है, जबकि एक बच्चे की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। इसके पहले महतैन में जिस बालिका की कुपोषण से मौत हुई थी, उसकी मां की भी चार डिलेवरी हो चुकी थी, पांचवी बार वह गर्भवती है। इससे साबित हो रहा है कि यहां परिवार नियोजन जैसे मुद्दे पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ढाई माह के टीका से भी वंचित
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा हर मंगलवार को नियमित टीकाकरण भी कराया जाता है। पथरा सुरांगी गांव की आंगलवाड़ी केंद्र में इन बच्चों को ढा़ई महीने में लगने वाला टीका भी नही लका। इन बच्चों को सिर्फ डेढ़ माह वाला टीका ही लग सका है। टीकाकरण से वंचित होने का जिम्मेंदार स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला ही है।
मामा का गंभीर आरोप: बिटिया को घर तक नहीं लाए, बीच रास्ते कर दिया अंतिम संस्कार
कुपोषण की वजह से मृत हुई सुप्रांशी के मामा ललित ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि आशा कार्यकर्ता और उसके बेटे ने सुप्रांशी के शव को घर तक नहीं लाने दिया। बीच रास्ते में मझगवां में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आशा और उसके बेटे को यह कह कर बिटिया का शव दिया गया था कि इसे घर ले जाएं। क्योंकि इसके भाई की गंभीर हालत होने पर उसके माता-पिता रीवा चले गए थे। लेकिन आशा ने श्याम प्रजापति जो सुप्रांशी के दादा लगते हैं उन्हें बुलाकर मझगवां में अंतिम संस्कार करवाया। श्याम का सुप्रांशी के परिवार से विवाद भी चल रहा है। मामा ललित ने बताया कि मैने आशा से बात की और कहा कि मेरे मम्मी पापा आ रहे हैं और रास्ते में है लेकिन उन्होंने इसका भी इंतजार नहीं किया। सुप्रांशी की दादी को बरगलाकर दस्तावेजी कार्यवाही के नाम पर मझगवां बुलाया गया और अंतिम संस्कार कर दिया।
सीडीपीओ और सुपरवाइजर को नोटिस जारी
कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने कहा कि इस मामले में सीडीपीओ और सुपरवाइजर को नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही महिला बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। इनके जवाब आने के बाद कार्यवाही की जाएगी। प्रथम दृष्टया इनकी लापरवाही पाई गई है।
कांग्रेस ने बोला तीखा हमला
कुपोषण से मौत के मामले को कांग्रेस ने आंड़े हाथों लेते हुए भाजपा सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि सतना से आई यह खबर बेहद पीड़ादायक और झकझोर देने वाली है, कुपोषण के कारण मात्र 4 माह की मासूम बच्ची की मौत हो जाना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता है। जब आंगनवाड़ी, पोषण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब ऐसे मामले यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर जमीनी स्तर पर योजनाएं पहुंच क्यों नहीं पा रहीं? एक मासूम जिंदगी समय पर इलाज और पोषण के अभाव में खत्म हो गई यह केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। जरूरत है कि जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो, व्यवस्था को सुधारा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा कुपोषण के कारण अपनी जान न गंवाए। हर बच्चे का जीवन सुरक्षित रखना ही सच्चा विकास है। .