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आग उगल रहा सूरज, पक्षियों के अंडे तक सूखने लगे

राजस्थान के मरुस्थल से गर्मी लेकर आने वाली हवाओं का सतना में कहर जारी है। सूर्य देव भी अब आग उगल रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि घोसलों में रखे पक्षियों के अंडे तक सूखने लगे हैं।

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सतना। सूरज की तपिश अब गर्मी का कहर बढ़ाने लगी है। आसमान में चिलचिलाती धूप अब झुलसाने लगी है। भगवान भास्कर के दिनों दिन रौद्र होते रूप की वजह से जनजीवन बेहाल होने लगा है। इसका असर पक्षियों पर भी अब देखने को मिल रहा है। पढ़ते तापमान की वजह से घोसलों में रखे अंडे सूखने लगे हैं और भ्रूण निर्जलीकरण के कारण खत्म हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में देखें तो गांवों में दोपहर के बाद सन्नाटे की स्थिति नजर आने लगी है और दूर-दूर तक वीराने सी स्थिति दिखने लगी है। शहर की गलियों में भी आमदरफ्त अब दोपहर को काफी कम हो गई है। जिला मौसम कार्यालय के अनुसार अभी तापमान स्थित रहेगा और राहत की बात यह है कि जिले में अभी हीट वेब (लू) की स्थिति आगामी एक सप्ताह तक नहीं है।

मौसम विभाग के अनुसार जिले में राजस्थान के ऊपर से उत्तरी पश्चिमी हवाएं आ रही है। इसकी वजह से तापमान में तेजी से उछाल देखने को मिला है। लेकिन अभी तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ही ऊपर चल रहा है। जब तापमापी का पारा सामान्य से 5 डिग्री तक ऊपर जाएगा तो जिले में भी लू की स्थितियां बनने लगेंगी। अभी एक सप्ताह तक यह स्थिति बनती नहीं दिख रही है।

गर्मी में सुरक्षित नहीं घोसलों के अंडे

जिसे तेजी से जिले के तापमान में बढ़ोत्तरी हुई है उसका सबसे ज्यादा असर पक्षी जगत में देखने को मिल रहा है। इस गर्मी में जिन पक्षियों के घोसले धूप की सिधाई में बने हैं या नम वातावरण से दूरी है, उनके अंडे भी सूख रहे हैं। विशेष तौर पर शहरी क्षेत्र में जो पक्षी घरों के रोशनदानों में दक्षिण -पश्चिम दिशा में अपना घोसला बनाए हैं उनके साथ यह स्थिति ज्यादा देखने को मिल रही है। शहरी क्षेत्र में घरों के रोशनदान में बने घोसलों में पेड़-पौधों की छाया वाली नमी नहीं मिलती है और इसका सीमेंट कांक्रीट तेजी से गर्म होता है। जिसके वजह से अंडे सूख जाते हैं। डिग्री कॉलेज में जुलाजी के प्रोफेसर डॉ शिवेश सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में पक्षियों के अंडे सूखना एक गंभीर समस्या होती है। इसकी मुख्य वजह अत्यधिक गर्मी, नमी की कमी और घोसले के तापमान में वृद्धि है। जब घोसले का तापमान 107 फारेनहाइट (लगभग 41.6 डिग्री सेल्सियस) के ऊपर हो जाता है तो अंडे विकसित नहीं हो पाते हैं और सूखकर खराब हो जाते हैं। इस स्थिति में वही अंडे बच पाते हैं जो घने पेड़ों में निचली और अंदरूनी डगाल पर बनाए जाते हैं। गर्मी में पक्षियों को भी निर्जलीकरण की समस्या होती है, विशेषतौर पर शहरी क्षेत्रों में। लिहाजा लोगों को पेड़ पौधों और अन्य स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी भरे सगोरे या बर्तन रखने चाहिए।

42 डिग्री के पार पहुंचा पारा

शनिवार को मौसम का तापमान 42 डिग्री के पार चला गया। जिला मौसम कार्यालय के अनुसार शनिवार 18 अप्रैल को अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो पिछले दिन के तापमान से 0.4 डिग्री ज्यादा रहा। सामान्य से यह तापमान 3.1 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है। वहीं रात का न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री दर्ज किया गया जो शुक्रवार 17 अप्रैल से 1.4 डिग्री ज्यादा रहा। यह भी सामान्य से 2.4 डिग्री ज्यादा है। अभी हवाओ की गति 3 से 5 किलोमीटर दर्ज की गई है।

सन्नाटे में सड़कें

सूरज की तपिश के चलते लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे हैं। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। अगर किसी जरूरी काम से निकल भी रहे हैं तो मुंह पर कपड़ा बांधकर निकल रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक हेलमेट के साथ सिर पर तौलिया बांधकर निकल रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। बाजार में दोपहर की दुकानदारी न के बराबर हो गई है और दुकानदार शाम का इंतजार करते देखे जा रहे हैं।

पशु पालकों की बढ़ी परेशानी

इस गर्मी में पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। सूख रहे पोखर व तालाब के कारण पशुओं के पेयजल व स्नान में पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर भैंस पालने वाले काफी परेशान हैं। इधर, जर्सी नस्ल की गायों पर भी इस मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। गायों में तेजी से हांफने के लक्षण दिखाई पड़ने लगे हैं।

छत की टंकियां बनी ‘उबलते पानी’ का घर, नल खोलते ही झुलसा रहा पानी

भीषण गर्मी में सूर्य देव के रौद्र रूप का असर अब घरों के भीतर तक पहुंच गया है। शहर में हालात ऐसे हो गए हैं कि छतों पर रखी पानी की टंकियों का पानी दिन में इतना गर्म हो रहा है कि नल खोलते ही हाथ धोना तक मुश्किल हो जा रहा है। दोपहर के समय स्थिति ऐसी बन रही है कि टंकी का पानी मानो धूप में उबाला गया हो। लोगों को इस पानी को उपयोग लायक बनाने के लिए बाल्टी या टब में भर कर अंदर एकाध घंटे के लिए छोड़नापड़ता है। इसके बाद भी पानी उपयोग लायक स्थिति में आ पाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार 40 डिग्री के पार पहुंचते तापमान और सीधी धूप के कारण प्लास्टिक टंकियां तेजी से गर्म हो जाती हैं। इससे पानी का तापमान भी खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। लोग अब टंकियों को ढकने, छाया करने या ठंडे पानी के वैकल्पिक इंतजाम करने की कोशिश में जुटे हैं। गर्मी का यह असर साफ संकेत है कि मौसम अब और सख्त होने वाला है।

शहर में अलग-अलग समय टंकी के पानी का यह रहा तापमान

दोपहर 12 बजे - 38.5 डिग्री

दोपहर बाद 2.30 बजे - 41.3 डिग्री

शाम 4.30 बजे - 42 डिग्री

अप्रेल में इस तरह बढ़ा तापमान

दिनांक - अधिकतम - न्यूनतम

18 - 42.2 - 25.4

17 - 41.8 - 24

16 - 40.9 - 23.7

15 - 41.7 - 22.6

14 - 39.9- 20.4

13 - 37 - 21.5

12 - 39 -20.9

11 - 35.8 - 19

10 - 34.3 - 19